वाराणसी। जमीन का अधिग्रहण हो रहा है परन्तु मुआवजा नहीं दिया जा रहा है के बाबत शिकायत को संज्ञान लेते हुए विकास प्राधिकरण के तहसीलदार ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में क्रियान्वित रोप-वे की पायलट परियोजना के अन्तर्गत प्रस्तावित रोप-वे स्टेशन व टावरों में से टावर संख्या टी-25 के निर्माण हेतु रामापुरा में स्थित अराजी संख्या-830 में क्षेत्रफल 170 वर्गमी० भूमि चिन्हांकित की गयी है। वर्तमान में उक्त चिन्हित स्थल का 154.11 वर्गमी0 क्षेत्रफल मकान सं० डी-47/189-190 से आच्छादित है, जो वर्तमान में अम्बावती पाण्डेय के नाम से नगर निगम के मूल्यांकन रजिस्टर में दर्ज है व उन्हीं के नाम से उक्त मकान का पीला कार्ड निर्गत है, जबकि राजस्व अभिलेखों के अनुसार ग्राम-रामापुरा की नॉन जेड०ए० खतौनी के अनुसार अराजी संख्या- 830 खाता संख्या-47 के जम्मन-15 मद-2 आबादी, सड़क, मकानात वगै0 के कालम में अंकित है, जिसमें नाम मालिकान के रूप में बाबू गोकुल चन्द्र वगै० मु० खे०खा०नं० 1 दर्ज है।

ज्ञातव्य है कि रोप-वे परियोजना के अन्तर्गत टावर सं0-25 के निर्माण हेतु ग्राम- रामापुरा में स्थित अराजी नं0-830 में क्षेत्रफल 170 वर्गमी० का चिन्हांकन किया गया है। अभिलेखीय जाँचोपरान्त यह तथ्य

आलोकित है कि उक्त भूखंड नॉन जेड०ए० खतौनी में अंकित आराजी सं0-830 जम्मन-15 मद -2 के अन्तर्गत आबादी की भूमि है, जिसका स्वामी शासन होता है। बताया कि शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेखीय साक्ष्य के अनुसार उनका भू-स्वामित्व सिद्ध नहीं करते हैं। इसके अलावा चिन्हित स्थल के स्वामित्व की स्थलीय जॉच के क्रम में प्रभावित भू-स्वामियों से स्वामित्व के सम्बन्ध में साक्ष्य मांगे गये। उनके द्वारा राजस्व अभिलेख खतौनी के सम्बन्ध में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। केवल नगर निगम का पीला कार्ड प्रस्तुत है, जिससे भू-स्वामित्व सिद्ध नहीं होता है।

बताया गया कि प्राधिकरण द्वारा वर्तमान में प्रार्थी के भवन को कोई क्षति नहीं पहुँचायी गयी है। प्रार्थी द्वारा भू-स्वामित्व सिद्ध न कर पाने की दशा में नियमानुसार प्रार्थी की माँ श्रीमती अम्बावती पाण्डेय को लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्धारित की गयी मात्र भवन मूल्यांकन की धनराशि मु0 43.17 लाख रूपये देय है। साथ ही उक्त प्रार्थना पत्र के विश्लेषण से यह तथ्य आलोकित है कि टावर टी-25 के निर्माण हेतु चिन्हित भूमि पर स्वामित्व सिद्ध न होने के कारण भूमि का मुआवजा देय नहीं है, बल्कि भवन के मूल्यांकन की राशि ही प्रार्थी के पक्ष में देय है।

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