
वाराणसी। शुक्रवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में “द एडटेक कनेक्ट: एम्पावरिंग द ग्लोबल साउथ” विषय पर सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के पांचवें दिन की शुरुआत प्रो. वी. वी. एस. कुमार, पूर्व चेयरमैन, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च, चेन्नई ने “टेक्नोलॉजी-एनेबल्ड फ़ॉर्मेटिव और समेटिव असेसमेंट” विषय पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल उपकरण शिक्षा में मूल्यांकन की प्रक्रिया को अधिक संवादात्मक और डेटा-आधारित बना रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि तकनीक का समावेश छात्रों के सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने में सहायक है।
इसी सत्र में डॉ. जे. के. त्रिपाठी,संयुक्त सचिव, यू.जी.सी., नई दिल्ली ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अंतर्गत प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रारूपिक और संपूर्ण मूल्यांकन की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एनईपी के प्रावधान छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को सशक्त बनाने में सहायक हैं।
द्वितीय सत्र में प्रो. तनु टंडन, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ ने “रिफ्लेक्टिव प्रैक्टिसेज़ और प्रोफ़ेशनल डेवलपमेंट पाथवे” तथा “साइबर हाइजीन और डिजिटल वेलबीइंग” पर विचार साझा किए। उन्होंने ने बताया कि निरंतर आत्ममूल्यांकन और सीखने की प्रक्रिया शिक्षकों तथा पेशेवरों को नई दिशा प्रदान करती है। तृतीय सत्र में डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, ने “मॉडल्स ऑफ डिजिटल गवर्नेंस एंड इंस्टिट्यूशनल स्ट्रक्चर्स” तथा “ट्रांसपेरेंसी, एथिक्स और अकाउंटेबिलिटी इन डिजिटल सिस्टम्स” पर विशेष चर्चा की। उन्होंने ने बताया कि आधुनिक तकनीक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बना रही है। साथ ही, उन्होंने डिजिटल प्रणालियों में पारदर्शिता, नैतिकता और जवाबदेही को सुशासन के लिए अनिवार्य बताया। चौथे सत्र में प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई, ने “लीडरशिप फ्रेमवर्क्स इन टेक्नोलॉजी-एन्हैंस्ड एजुकेशन” तथा “लीगल एंड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क्स फॉर एड-टेक” विषय पर विशेष चर्चा की। उन्होंने ने बताया कि डिजिटल साधनों के प्रयोग से शिक्षा में नेतृत्व और प्रबंधन की नई संभावनाएं खुल रही हैं।
इस कार्यक्रम में श्रीलंका, कम्बोडिया, घाना, किर्गिस्तान, मॉरीशस, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, और इथियोपिया, ट्यूनीशिया 11 देशों के 25 शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम के निदेशक प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई हैं, जबकि इसका समन्वयन डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई द्वारा किया जा रहा है। सह-समन्वयक के रूप में डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। केंद्र के अन्य समस्त संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों ने भी इस अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफल आयोजन प्रक्रिया में सक्रिय योगदान कर रहे हैं।
