वाराणसी। जिले में क्षय रोग नियंत्रण के उद्देश्य से शहरी और ग्रामीण इलाकों में अभियान चलाकर स्क्रीनिंग करायी जा रही है। इसमें अल्ट्रापोर्टेबल हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीन से जांच करायी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सोमवार को आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वास्थ्य उपकेन्द्र करघना प्रथम में आयोजित कैम्प में अल्ट्रापोर्टेबल हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीन से जांच की गई, जिसकी रिपोर्ट एक मिनट में मिल गई। कैम्प में कुल 180 मरीजों की जाँच की गई, जिसमें 19 मरीज टीबी संभावित पाये गये| यह मशीन सेंट्रल टीबी डिवीज़न के द्वारा विलियम जे क्लिंटन फ़ाउंडेशन (डबल्यूजेसीएफ़) के सहयोग से प्राप्त हुई है।

सीएमओ डॉ संदीप चौधरी ने बताया कि टीबी सक्रिय रोगी खोज (एसीएफ) अभियान और टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) को सुदृढ़ीकरण करने के लिए सरकार की ओर से यह पहल की गई है। जिन जगहों पर अभियान के दौरान सर्वाधिक टीबी रोगी मिले हैं अथवा मिलते हैं, वहां विशेष शिविर लगाकर संभावित लक्षण वाले मरीजों की जांच की जाती है। जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. पीयूष राय ने बताया कि इस अवसर पर वर्ल्ड बैंक की टीम द्वारा कैम्प का निरीक्षण किया गया| टीम ने शिवपुर में सीबीनाट टेस्ट की साइट भी देखी, प्रक्रिया की पूरी जानकारी ली, और जनपद वाराणसी में मरीजों की पहचान, जाँच व इलाज में और सुधार के बारे में महतवपूर्ण सुझाव दिये, टीम कल कोनिया और बीएचयू भी जायेगी| डॉ राय ने बताया कि एक्स-रे मशीन से जांच के बाद एक मिनट में रिपोर्ट मिलने से काफी सुविधा हो गई है। टीबी की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्ति का समय से उपचार भी शुरू कर दिया जाता है। मार्च 2024 से इस तरह के कैम्प शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लगाये जा रहे हैं, इस कार्यक्रम के अंतर्गत 24 कैम्प हर महीने लगाये जा रहे हैं| अभी तक कुल 133 कैम्प लगाये गये हैं जिसमें 9035 मरीजों की स्क्रीनिंग की गई है| 652 टीबी संभावित पाये गये हैं, जिसमें 58 का इलाज चल रहा है|

टीबी के लक्षण हों तो जरूर करायें जांच-डीटीओ डॉ पीयूष राय ने बताया कि दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी, खांसी के साथ बलगमआना,बलगममेंखून आना, वजन कम होना, भूख न लगना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना आदि टीबी के लक्षणहैं। इस तरह के लक्षण नजर आयें तो जांच जरूर करायें।

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