वाराणसी। वाराणसी में सरकार द्वारा गंगा नदी एवं उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त किये जाने हेतु किये जा रहे सतत प्रयास के अब परिणाम दिखाई देने लगे है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2014 में प्रारम्भ किये गये नमामि गंगे कार्यक्रम के अन्तर्गत वाराणसी में 200 एमएलडी क्षमता के एसटीपी स्थापित किये गये है। इसके अतिरिक्त जे०एन०एन०यू०आर०एम० कार्यक्रम के अन्तर्गत 120 एम0एल0डी0 क्षमता का एस०टी०पी० गोइठहाँ में स्थापित किया गया है।
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, उ0प्र0 जल निगम (ग्रामीण), वाराणसी के परियोजना प्रबन्धक आशीष कुम्पुर सिंह द्वारा बताया गया कि वर्ष 2017 तक वाराणसी में एस०टी०पी० की शोधन क्षमता मात्र 100 एमएलडी थी, जो कि वर्तमान में 420 एमएलडी हो गयी है। क्षमता वृद्धि के कारण गंगा नदी की जल की गुणवत्ता में भी अपेक्षित सुधार हुआ है। वर्ष 2022 के पूर्व केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा वाराणसी में गंगा नदी को प्राथमिकता खण्ड-4 में रखा गया था, जिसे अब हटाकर प्राथमिकता खण्ड-5 में कर दिया गया है। प्राथमिकता खण्ड में बी0ओ0डी0 की मात्रा 6-10 पीपीएम होती है, जबकि प्राथमिकता खण्ड-5 में बी०ओ०डी० की मात्रा 3-6 पीपीएम होती है तथा फीकल कॉलीफॉम वर्ष 2017 में गंगा नदी के अपस्ट्रीम में 1300 तथा डाउनस्ट्रीम में 23000 एमपीएन/100 एम0एल पाया गया था, जबकि वर्ष 2024 में गंगा नदी में अपस्ट्रीम में 490 एवं डाउनस्ट्री में 4900 एमपीएन/100 एम0एल पाया गया है। जो कि उoप्रo प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा नेशनल वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्रोग्राम के अन्तर्गत वर्ष 2017 एवं वर्ष 2024 में वाराणसी में गंगा नदी के जल के नमूनो की जाँच से भी परिलक्षित होता है। शहर में वर्तमान में 55 एमएलडी क्षमता का एस०टी०पी० नमामि गंगे कार्यक्रम के अन्तर्गत भगवानपुर में एवं 07 एमएमडी क्षमता का एसटीपी अमृत 2.0 के अन्तर्गत सूजाबाद में निर्माणाधीन है। भविष्य की परियोजनाओं की अगर बात करे तो लोहता में बहने वाला दुर्गा नाला हेतु 55 एमएलडी क्षमता का एसटीपी एवं दीनापुर में स्थापित 80 एमएलडी क्षमता के एसटीपी की क्षमता वृद्धि 220 एमएलडी पर किये जाने की परियोजना भी नमामि गंगे कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रेषित की गयी है, जिसे जल्द स्वीकृति होने की सम्भावना है। इन एसटीपी के निर्माण के उपरान्त गंगा एवं वरुणा नदी के गुणवत्ता में और अधिक सुधार होने की उम्मीद है।वर्तमान में वाराणसी में 8 एमएलडी का भगवानपुर, 12 एमएलडी बीएलडबल्यू, 80 एमएलडी दीनापुर, 140 एमएलडी दीनापुर, 120 एमएलडी गोइटहा, 50 एमएलडी रमना तथा 10 एमएलडी रामनगर में स्थापित एवं क्रियाशील हैं।
