वाराणसी। हिंदी साहित्यिक परंपरा में जहां स्त्रियां केवल कथा में एक पात्र मात्र से अधिक की स्थिति में उपस्थित नहीं थी। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद, जिन्होंने अपने स्त्री पात्रों को एक ठोस सामाजिक-आर्थिक आधार पर रखकर उनकी समाज में अभिव्यक्ति को संभव बनाया। प्रेमचंद ने अपनी लेखनी से निकल कर पन्नों पर आकार ग्रहण करते शब्द- जिनसे अंततः हिंदी साहित्य की नई सोच निर्मित होता है। यह बातें प्रो. श्रद्धानंद ने प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा प्रेमचंद स्मारक स्थल लमही में आयोजित सुनों मैं प्रेमचंद कहानी पाठ 1434 दिवस पूर्ण होने पर प्रेमचंद की कहानी मिस पद्मा का पाठ रंगकर्मी अविनाश पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव, निदेशक राजीव गोंड, डा. संजय श्रीवास्तव,चंदन पटेल, रामजी सिंह, रोहित गुप्ता, संजय श्रीवास्तव, सुरेश दूबे, राहुल विश्वकर्मा, राहुल यादव, अंकित सिंह,आयुषी दूबे, मनोज विश्वकर्मा आदि थे।

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