
अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र में दो दिवसीय कार्यशाला

वाराणसी । मंगलवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, बीएचयू, वाराणसी द्वारा ‘ग्लोबल पर्सपेक्टिव ऑफ इंडियन एजुकेशन’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का शुभारम्भ व आयोजन आई.यू.सी.टी.ई. परिसर में हुआ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण व मां सरस्वती तथा महामना मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। यह संगोष्ठी भारतीय विश्वविद्यालयों व विद्यालयों के शिक्षकों, छात्रों, प्रशासनिक अधिकारियों व शिक्षा जगत से जुड़े हुए सभी वर्गो के लिए शैक्षणिक क्षेत्रों में गहराई से विचार-विमर्श करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रहा है। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. जे.पी. लाल, कुलाधिपति, रांची केंद्रीय विश्वविद्यालय, रांची तथा विशिष्ट अतिथि इंजी. राजेश मेहतानी, निदेशक, उत्कृष्टता और प्रशिक्षण केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार थे।
इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, बीएचयू ने की।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. जे.पी. लाल ने कहा कि हम सभी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के हितधारक हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 हमारी शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने और हमारी समग्र प्राचीन शिक्षा पद्धति के साथ समन्वय बैठाने की नीति है। हमें अपने गुरुकुल शिक्षा पद्धति से सीखना चाहिए। साथ ही में उन्होंने महामना के शिक्षा दृष्टि के बारे में चिंतन करने की बात कही।
विशिष्ट अतिथि इंजी. राजेश मेहतानी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण ही होना चाहिए। शिक्षा में परिवर्तन तब तक नहीं आएगा जब तक चेतना जाग्रत न हो। यह भी रेखांकित किया कि विद्यार्थियों में कौशल का विकास राष्ट्रीय उत्थान के लिए अनिवार्य है।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए केंद्र के निदेशक, प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने कहा कि भारत देश सबसे युवा आबादी वाला देश है इसलिए हमें वर्तमान और भविष्य दोनों का निर्माण करने के लिए चिंतन करने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि हमें जिस प्रकार का विकास, देश व समाज चाहिए उसी प्रकार की शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है। हमें मानवता की शिक्षा व नैतिकता पर भी गहन विचार करने की आवश्यकता है।
इस कॉनक्लेव में दो समानांतर सत्रों में कुल 14 सत्र आयोजित हुए। साथ ही आईयूसीटीई परिसर में पुस्तक मेले का भी आयोजन हुआ।
इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के 100 से ज्यादा प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं।
अतिथियों का स्वागत व विषय उपस्थापन प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख, शिक्षण व शोध ने किया। मंगलाचरण डॉ. राजा पाठक तथा संचालन तथा संयोजन डॉ. कुशाग्री सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन व सह संयोजन डॉ. अनिल कुमार ने किया।
इस कार्यक्रममें केंद्र के प्रो. आशीष श्रीवास्तव (डीन, शैक्षणिक व शोध), प्रो. अजय कुमार सिंह, डॉ. विनोद कुमार सिंह, डॉ. दीप्ति गुप्ता, डॉ. राजा पाठक, डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी सहित शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक कर्मचारी उपस्थित रहे।
