वाराणसी।‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य ‘स्वामिश्रीः’ अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’ का विश्व के धार्मिकों के नाम ( 1955885126वें) नव संवत्सर पर शिव-सन्देश में कहा

वर्तमान सृष्टि के 1 अरब 95 करोड 58 लाख 85 हजार 126 वें वर्षारम्भ की अनेकानेक शुभकामनायें और शुभाशीर्वाद।

यह गिनती हमें परम्परा से मिली है जिसे हम सृष्टि के पहले दिन से प्रतिदिन किये जाने वाले अपने प्रत्येक महत्त्वपूर्ण कार्य के आरंभ में किये जाने वाले संकल्प के माध्यम से ताजा रखते आये हैं। यहां ज्ञातव्य है कि पहला संकल्प स्वयं ब्रह्माजी ने सृष्टि रचना का आरंभ करते हुये लिया था।

चैत्रे मासि जगद्ब्रह्मा ससर्ज प्रथमेऽहनि।

शुक्ले पक्षे समग्रे तु तथा सूर्योदये सति ॥

यह सत्य सनातन धर्म है जो सृष्टि के आरंभ से आज इतने वर्ष बीत जाने पर भी जीवमात्र के कल्याण के लिये जागृत और प्रवहमान है।

हमारा यह मानना है कि धर्म के क्षेत्र में धर्मोपदेष्टा का महत्त्व तो है पर जब हम उस उपदेष्टा को धर्म के शाश्वत मूल्यों के ऊपर रख उसका अन्धानुकरण आरम्भ कर देते हैं तो अनर्थ वहीं से आरम्भ हो जाता है और उसी दिशा में आगे बढते रहने से तो प्रायः कुछ ही दिनों में वह अनर्थ महान् अर्थात् भयंकर हो जाता है।

इसलिये एक सच्चा सनातनी या परमधार्मिक हर उपदेष्टा का आदर तो करता है पर किसी व्यक्ति विशेष से बंधता नहीं है और धर्म के शाश्वत मूल्यों को अपने जीवन में समाहित कर अपना आध्यात्मिक उन्नयन कर लेता है।

विगत वर्ष जो लक्ष्य हमने रखे थे श्रीगुरुमहाराज और भगवती की कृपा से उसमें लगभग सफल रहे हैं।

इस संवत्सर हमने तैंतीस करोड लोगों से सम्पर्क कर उनसे संवाद स्थापित करने का लक्ष्य रखा है जिसे श्रीशंकराचार्य तकनीकी और जीवंत धर्मदूतों के माध्यम से पूरा करना चाहेंगे।

इस संवाद में धर्म के सभी विषय सम्मिलित हैं जिनमें से गोकुल, गुरुकुल और सत्कुल मुख्य होंगे।

वाराणसी में पायलट जिला_

गोमतदाता संकल्प, रामा गौ की पहचान सहित रामाधाम निर्माण और बूचडखाना सुधार कार्यक्रम का पाइलट जिला वाराणसी होगा जिसमें आज से ही कार्य आरंभ कर दिया जायेगा।

परम्परानुसार काशी के शंकराचार्यघाट पर सनातनी पंचांग का विमोचन किया है और मठ भवन पर धर्मध्वज भी फहराई है। श्रीगणेशाम्बिका तथा संवत्सर के राजा श्रीसूर्य के पूजन पुरस्सर ब्रह्मा जी की पूजा कर वर्ष की सफलता का —

‘भगवंस्त्वत्प्रसादेन वर्षं क्षेममिहास्तु मे। संवत्सरोपसर्गा मे विलयं यान्त्वशेषतः’ कहकर आशीर्वाद भी मांगा है और नीम के पत्ते के साथ यथोक्त प्रसाद भी बांटा है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से अनेकों वर्षों से काशी के श्रीशंकराचार्य घाट पर योगाभ्यासियों को योग, आसन, प्राणायाम और गणेश वन्दना, सूर्मनमस्कार, शिव परिक्रमा, विष्णु ध्यान और गंगा आरती के माध्यम से पंचदेवोपासना के संस्कार के साथ उत्तम स्वास्थ्य की शिक्षा दी जाती है , काशी के घाट पर योगाभ्यास की संस्कृति का विकास इसी शंकराचार्य घाट पर सबसे पहले हुआ ।

भारत वर्ष सहित समस्त विश्व में भारतीय मान्यता के अनुसार चलने वाले करोडों आस्तिकों का विगत अनेक वर्षों से काल गणना, व्रत, पर्व, यात्रा , अनुष्ठान तथा समस्त क्रियाकलापों में सहायक ये सनातनी पंचांग जिसे सनातन धर्म के सर्वोच्च चारो शंकराचार्य पीठ का शुभाशीर्वाद सदा से प्राप्त है, उसका विमोचन आज पूज्यपाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ जी महाराज के करकमलों से सम्पन्न हुआ इस अवसर पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागीय आचार्य श्री शत्रुघ्न त्रिपाठी जी , विद्याश्री चैरिटेबल ट्रस्ट के न्यासी श्री अविनाश अन्तेरिया जी, ग्लोरियस एकेडमिक के श्री गिरीशचन्द्र तिवारी जी उपस्थित रहे ।

आज के कार्यक्रम में उपस्थित रहे सर्वश्री शारदानन ब्रह्मचारी जी, साध्वी शारदाम्बा देवी जी, साध्वी पूर्णाम्बा देवी जी, स्वामी श्रीनिधिरव्यानन्द सागर , स्वामी अप्रमेयशिवसाक्षात्कृतानन्दगिरि, परमात्मानन्द ब्रह्मचारी, प्रभुप्रभूतानन्द ब्रह्मचारी, स्वयंभवानन्द ब्रह्मचारी, सर्वभूतहृदयानन्द ब्रह्मचारी, संजय पाण्डेय, सौवीर नागर, रंजन शर्मा, शम्भूशरण पाण्डेय, अमित तिवारी, शिवाकान्त मिश्र, ओमप्रकाश पाण्डेय आदि उपस्थित रहे ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *