वाराणसी। फेडरल रिसर्च रिकाग्निशन काउंसिल ने ग्लोबल एक्सिलेंस अवार्ड से हैदराबाद में डा ओम प्रकाश शर्मा को सम्मानित किया। ग्लोबल एक्सिलेंस अवार्ड मिलने पर चिकित्सा जगत में हर्ष व्याप्त है।

डा ओम प्रकाश शर्मा के अनुसार चिकित्सा जगत में पैथालाजी और रेडियालाजी दो ऐसे विषय पढ़ाये जाते है, जिनका रोग निदान में अहम रोल है।

ओम प्रकाश शर्मा ने चिकित्सा के आयाम मेडिसिन और सर्जरी के स्थान पर रेडियालाजी को चयन किया।1972 में जूनियर डाक्टर के रुप में रोगों के निदान में लग गए। चिकित्सा विज्ञान संस्थान के रेडियालाजी विभाग से एम डी कर सन् 1977 में प्रवक्ता बने ।

शुरु में एक्स-रे से फोटो लेकर रोग का निदान किया जाता रहा। 1992 में रोग विज्ञान पर शोध कर पीएचडी की उपाधि प्राप्त किया।इसी मध्य साउण्ड तरंगों पर आधारित अल्ट्रासाउंड के युग का आगाज हुआ।

डॉ शर्मा ने विशेष ट्रेनिंग प्राप्त कर यकृत पित्ताशय तथा पौरुष ग्रन्थि सम्बन्धित रोग पर विशेष दक्षता प्राप्त कर पूर्वी उत्तरी भारत में अपना विशिष्ट स्थान बना लिए। अपने सेवा के तीसरे दशक में सीटी स्कैन मशीन में साफ्टवेयर में परिवर्तन करवा कर कोरोनरी एंजियोग्राफी में नये आयाम को जोड़ा। जिससे हृदयाघात और पैदाइशी हृदय विकार का निदान को स्थापित किया।

बीएचयू से सेवानिवृत्त होने पर 2019 फरवरी में टाटा समूह द्वारा स्थापित टाटा कैंसर संस्थान में विभागाध्यक्ष के रुप में सेवा दी। 2023 मई में एमसीएच विंग चन्दौली में रेडियॉलाजिस्ट के रुप में सेवा दे रहे है।

ज्ञातव्य हो कि रेडियॉलाजिस्ट को अभी भी उतना महत्व नही दिया जाता जितना मेडिसिन सर्जरी विशेषज्ञ को प्राप्त है, परन्तु सर्वोत्तम इलाज के लिए सही निदान जरुरी है जो डॉ ओ पी शर्मा प्रदान कर रहे है। कहना अतिशयोक्ति नहीं कि डॉ ओ पी शर्मा समय के साथ-साथ रेडियॉलाजिस्ट के रुप में अपना सर्वोच्च स्थान बनाने में सफल रहे है।

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