वाराणसी।भारत की रक्षा शक्ति, रणनीतिक दक्षता और मानवीय संवेदना का प्रतीक बनकर उभरा “ऑपरेशन सिन्दूर” न केवल एक सैन्य अभियान की सफलता है, अपितु यह भारत की सम्प्रभुता, नागरिकों के प्रति दायित्वबोध, और विश्व पटल पर उसके सशक्त नेतृत्व का ज्वलन्त प्रमाण है।
इस गौरवपूर्ण अवसर पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी की ओर से मैं, कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा, भारत सरकार, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, रक्षा मंत्रालय तथा भारतीय सेना के सभी वीर सैनिकों को कोटिशः बधाई एवं हार्दिक अभिनन्दन प्रेषित करता हूँ।
भारतीय सेना ने इस अभियान में जिस दक्षता, संयम, विवेक और शौर्य का परिचय दिया, वह अतुलनीय है। यह केवल एक सैन्य कार्यवाही नहीं थी, बल्कि राष्ट्र के नागरिकों की सुरक्षा, वैश्विक कूटनीति और मानवीय मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल थी। ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ की सनातन भावना के अनुरूप भारत की सेनाओं ने यह सिद्ध किया है कि हमारी परंपराएँ केवल आस्था की वस्तु नहीं, अपितु व्यवहार में भी राष्ट्र के कल्याण की वाहक हैं।
ऑपरेशन सिन्दूर का संचालन न केवल सामरिक दृष्टि से अद्वितीय रहा, बल्कि यह विश्व समुदाय के समक्ष भारत की शांतिप्रियता, सामर्थ्य और निर्णायक नेतृत्व का सशक्त सन्देश भी है। इस अभियान के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है, चाहे वे देश की सीमाओं के भीतर हों या कहीं और।
यह सफलता हमारे युवाओं में राष्ट्रभक्ति, सेवा और बलिदान की भावना को और अधिक सुदृढ़ करेगी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, जिसकी जड़ें भारतीय ज्ञान परम्परा में गहराई से समाहित हैं, सदैव से ही राष्ट्रोत्थान, संस्कृति-रक्षा और चरित्र-निर्माण के संकल्प के साथ शिक्षा देता आया है। सेना का यह पराक्रम हमारे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
मैं एक बार पुनः भारतीय सेना के शौर्य, भारत सरकार की दूरदर्शिता, और इस अभियान से जुड़े समस्त अधिकारियों व सैनिकों को नमन करता हूँ। यह सफलता भारत के गौरवशाली भविष्य की ओर एक और दृढ़ कदम है।

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