वाराणसी।पालि सोसाइटी ऑफ इंडिया के महासचिव के रूप में, मैं भारत सरकार से निवेदन करता हूं कि देश के प्राचीनतम विद्या केंद्र सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में पालि संस्थान की स्थापना करें।

*भारत सरकार के द्वारा पालि भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा*–

 

भारत सरकार के द्वारा पालि भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से इसकी गरिमा और बढ़ गई है। भगवान बुद्ध के उपदेश पालि भाषा में होने से यह हमारी सनातन ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पालि भाषा में नवीन रचनाएं भी रची जा रही हैं और “पालि पटिपदा” पत्रिका का प्रकाशन पालि सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा किया जा रहा है।

*पालि संस्थान की स्थापना से पालि भाषा का विकास*–

पालि संस्थान की स्थापना से पालि भाषा का विकास होगा और हमारी सनातन ज्ञान परंपरा का प्रचार-प्रसार होगा। मैं आशा करता हूं कि भारत सरकार इस प्रस्ताव पर विचार करेगी और पालि संस्थान की स्थापना करेगी।

उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा-27(4) के अधीन प्रो० रमेश प्रसाद, आचार्य-पालि एवं थेरवाद विभाग के विभागाध्यक्ष,तीन वर्ष के लिए श्रमण विद्या संकाय के संकायाध्यक्ष बनाये गये हैं।

संकायाध्यक्ष के कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत प्रो• रमेश प्रसाद ने व्यक्त किया।

ज्ञातव्य हो कि दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत 1998 में पालि एवं थेरवाद वाद विभाग में नियुक्त प्रो• प्रसाद अपने संकाय के अन्तर्गत विभागाध्यक्ष 1. पालि एवं थेरवाद,2. बौद्ध दर्शन ,3. जैन दर्शन4. प्राकृत एवं जैनागम ,5. संस्कृत विद्या विभाग इसके अतिरिक्त 1. निदेशक – ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र,2. समन्वयक – आइक्यूएसी,3. वैदेशिक छात्र सलाहकार4. सदस्य – कार्य परिषद,5. अनेक समितियों के अध्यक्ष एवं नोडल अधिकारी के साथ ,6.पालि सोसाइटी ऑफ इंडिया के जनरल सेक्रेटरी/ महासचिव

आदि दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

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