
डेवलपिंग मूक्स एण्ड एंगोजिंग डिजिटल कंटेंट” विषयक छः दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन

वाराणसी। सोमवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, बीएचयू, वाराणसी में “डेवलपिंग मूक्स एंड एंगेजिंग डिजिटल कंटेंट” विषयक छः दिवसीय लघु अवधि कार्यक्रम का शुभारम्भ व आयोजन आई.यू.सी.टी.ई. परिसर में हुआ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण व मां सरस्वती तथा महामना मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को मैसिव ओपन एंड ऑनलाइन कोर्सेस विकास में व्यावहारिक प्रशिक्षण और सैद्धांतिक आधार प्रदान करने, डिजिटल सामग्री निर्माण करने, ऑनलाइन शिक्षण के वातावरण निर्माण करने और डिजिटल सामग्री निर्माण के लिए प्रासंगिक उपकरणों और प्लेट फार्मों के साथ दक्षता प्रदान करने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. शिव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, विज्ञान भारती, दिल्ली तथा विशिष्ट अतिथि मध्य प्रदेश सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक, भोपाल से प्रो. अनिल कोठारी रहे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता आईयूसीटीई के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने की।
प्रथम व उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. शिव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, विज्ञान भारती, दिल्ली ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ‘आचार्य: देवो भव’ की भावना भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। आचार्यों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। आचार्य के महत्व के तीन प्रमुख कारण- बालक के सर्वांगीण विकास का ध्यान रखने, विद्यार्थियों के शिक्षित होने पर प्रसन्नता का अनुभव करने, समाज और सृष्टि के लिए समग्रता का भाव रखना है। आचार्य व्यष्टि से समष्टि का भाव रखते हुए समाज और सृष्टि के कल्याण के लिए काम करते हैं। वक्ता ने ज्ञान प्राप्त करने के महत्वपूर्ण घटकों- पठन, पाठन, एकांतिक, मनन, निदिध्यासन, अनुप्रयोग की चर्चा की। इन घटकों के माध्यम से विद्यार्थी ज्ञान को प्राप्त कर सकते हैं और उसका अनुप्रयोग अपने जीवन में कर सकते हैं। वक्ता ने एनईपी 2020 में निहित अनुभवात्मक अधिगम के महत्व पर भी प्रकाश डाला और ‘स्वयम’ जैसे प्लेटफॉर्म शिक्षकों को अवसर प्रदान करते हैं जिससे वे अनुभवात्मक अधिगम को अपनाकर विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकते हैं।
विशिष्ट अतिथि प्रो. अनिल कोठारी, वैज्ञानिक सलाहकार, मध्य प्रदेश सरकार और महानिदेशक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भोपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि ‘स्वयम्’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म शिक्षकों को स्वयं को अपग्रेड और अपस्किल करने के अवसर प्रदान करते हैं। इससे न केवल शिक्षकों की क्षमताएं बढ़ती हैं, बल्कि छात्रों को भी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच में मदद करते हैं। एआर, वीआर और एआई का उपयोग शिक्षकों को 360 डिग्री प्रभावशीलता प्रदान करती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म अब एक विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। इससे हम विकसित भारत@2047 के लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में केंद्र के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने सभी प्रतिभागियों और मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रशिक्षण और परीक्षण प्रधान व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस परंपरा में ज्ञान के आदान-प्रदान और दान-प्रतिदान की भावना को बढ़ावा दिया गया था। आज के समय में हमें ऑनलाइन और ऑफलाइन साधनों के मिश्रण की आवश्यकता है, जिससे अच्छी शिक्षा को सभी तक पहुंचाया जा सके। यह मिश्रण हमें पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय करने में मदद कर सकता है। यह कार्यक्रम शिक्षकों में कौशलों को बढ़ाने का काम करेगा। प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (अकादमिक व शोध) ने इस कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे प्रतिभागियों और अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि यह डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का समय है। प्रौद्योगिकी अब विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। आज के समय में मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज शिक्षा को लोकतांत्रिक बनाने वाली एक शक्ति है।
अगले सत्र में प्रो. किरण लता डंगवाल, शिक्षा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ ने ‘स्वयम् 2024 दिशा-निर्देशों व मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बहुआयामी, रोजगारोन्मुखी अधिगम परिणामों पर आधारित दिशा-निर्देशों पर चर्चा की। प्रो. डंगवाल ने अनुदेशात्मक डिजाइन की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए एक ऑनलाइन पाठ्यक्रम का भी प्रदर्शन किया व हैंड्स-ऑन भी कराया, जिसमें प्रभावी पाठ्यक्रम नियोजन, वितरण सहित व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदर्शित किया। उन्होंने मूक्स के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत व्याख्या भी की तथा शिक्षार्थियों की सहभागिता बढ़ाने और प्रभावी सामग्री वितरण में उनके महत्व पर जोर दिया। इसके बाद प्रतिभागियों ने अपने-अपने विषय क्षेत्रों में मूक्स के लिए एक रूपरेखा तैयार की जिसमें सत्र के दौरान चर्चा भी की गई।
इस छः दिवसीय लघु अवधि कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, उतर प्रदेश, उत्तराखंड सहित 12 राज्यों से 48 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। इस लघु अवधि कार्यक्रम में केंद्र के प्रो. आशीष श्रीवास्तव, प्रो. अजय कुमार सिंह, डॉ. विनोद कुमार सिंह, डॉ. कुशाग्री सिंह, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, डॉ. राज सिंह, डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, डॉ. अनिल कुमार सहित गैर-शैक्षणिक कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम समन्वयन डॉ. दीप्ति गुप्ता तथा सह-समन्वयन डॉ. राजा पाठक ने किया।
