
वाराणसी।डोमरी, रामनगर, स्थित आचार्य सीताराम चतुर्वेदी महिला महाविद्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का विषय– विश्व पर्यावरण दिवस: प्रकृति के साथ संवाद, रहा।
सर्वप्रथम गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए महाविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. सूर्य प्रकाश वर्मा ने इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस का थीम प्लास्टिक प्रदूषण को हराना बताया। उन्होंने ट्रिपल R के बारे में बताया की कैसे Refuse, Reduce & Reuse के द्वारा प्लास्टिक प्रदूषण से बचा जा सकता है।
प्रवक्ता वरुण ने पर्यावरण संरक्षण के बारे में अपना विचार व्यक्त किया।
प्रवक्ता दीपक ने गोष्ठी में बोलते हुए कहा कि हाथ से बने थैलों का प्रयोग करने से पर्यावरण को सुरक्षित किया जा सकता है।
प्रवक्ता लवकेश ने कहा कि गांधी जी का कहना था कि हस्त निर्मित वस्तुओं का प्रयोग करने से पर्यावरण को सुरक्षित एवं संरक्षित किया जा सकता है।
डॉ. रजनी श्रीवास्तव ने सभी को वर्ष में कम से कम एक पेड़ लगाने का संकल्प लेने के लिए कहा।
डॉ. प्रतिमा राय ने प्रकृति के संवाद पर कविता प्रस्तुत किया।
डॉ. सुनीति गुप्ता ने प्लास्टिक के कारखानों को बंद करने का आह्वान चलाने पर जोर दिया।
डॉ. अरुण कुमार दुबे ने कहा कि पर्यावरण हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने शरीर के पांच तत्वों पर प्रकाश डाला तथा वातावरण की स्वच्छता पर बल दिया।
महाविद्यालय की निदेशक प्रो. कल्पलता पाण्डेय जी ने गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए बताया कि हमारे जीवन में पेड़ों का बहुत महत्व है। हमारे धर्म में भी पेड़ो में आस्था है तथा पृथ्वी को हम मां कहते है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण नहीं रहेगा, तो हमारा अस्तित्व ही नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि कुछ ऐसे प्लास्टिक होते है, जो मिट्टी में दब जाते हैं। वह पर्यावरण के लिए जहर के समान है। प्लास्टिक का पूर्ण रूप से बहिष्कार करना चाहिए। एक वृक्ष मां के नाम लगाने की मुहिम को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने “पर्वत कहता शीश उठाकर तुम भी ऊंचे बन जाओ” नामक कविता भी सुनाया।
अंत में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने के लिए महाविद्यालय परिवार द्वारा प्रतिज्ञा लिया गया।
