
वाराणसी।श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमन एक्सीलेंस, कलबुर्गी, कर्नाटक व अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘उच्च शिक्षा में मूल्यों का समावेश’ विषय पर छह दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
संकाय विकास कार्यक्रम के दूसरे दिन का मुख्य विषय ‘मूल्य शिक्षा के दार्शनिक आधार’ रहा। इसमें प्रतिभागियों को मूल्य-उन्मुख शिक्षण पद्धतियों को निर्देशित करने वाली सैद्धांतिक नींव की गहरी समझ प्रदान की गई।
जगन्नाथ विश्वविद्यालय, जयपुर की माननीय कुलपति प्रोफेसर वैशाली शर्मा और भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष व सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. एन.पी. सिंह ने विभिन्न सत्रों में अपना व्याख्यान देते हुए भारतीय शैक्षिक दर्शन में निहित प्राचीन ज्ञान और आधुनिक शैक्षणिक परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता पर गहन चर्चा की। उन्होंने कहा कि कैसे वेदांत, सांख्य और योग इत्यादि प्राचीन भारतीय विचार प्रणालियाँ मूल्यों को विकसित करने के लिए एक मजबूत ढाँचा प्रदान करती हैं, जो आत्म- साक्षात्कार, आंतरिक परिवर्तन और नैतिक जीवन पर जोर देती हैं। प्रतिभागियों को शिक्षक की भूमिका पर फिर से विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, न केवल ज्ञान प्रदाता के रूप में बल्कि छात्रों के चरित्र निर्माण में एक नैतिक आदर्श और मार्गदर्शक के रूप में भी।
इस कार्यक्रम में भारत भर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के 150 से अधिक शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का संयोजन प्रो. मीनाक्षी बिश्वाल और प्रो. अजय कुमार सिंह द्वारा किया जा रहा है। आज के सत्रों का संचालन एस.एस.एस.यू. एच.ई., कर्नाटक के श्री नागार्जुन और आई.यू.सी.टी.ई., वाराणसी के डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने किया।
