वाल्मीकि के पवित्र श्लोकों से गूंजीती रही काशी केदार खंड की गलिया

 

रिपोर्ट:- अनुपम भट्टाचार्य 

 

वाराणसी। काशी केदार खंड की गलियां रविवार को भी वाल्मीकि रामायण के पवित्र श्लोकों से गुजीती रहीं। यह सुयोग उपस्थित था मानसरोवर तीर्थ क्षेत्र के श्री रामा तारक आंध्रा आश्रम में चल रहे श्री राम साम्राज्य पट्टाभिषेक महोत्सव की आमा-प्रभा के चलते।

उत्सव के चौथे दिन यज्ञ पंडप

जहाँ वैदिक विद्वानो ने वाल्मीकि रामायण के अन्य कांड के श्लोकों से ऋषि-मुनियों के नाम से आहुतियां समर्पित की। विशेष  कर पक्षी राज जटायु के नाम से यज्ञ-हवनादि किये गए। इसके समानांतर रामालय की वीचिकाओं में रामायण के अरण्य कांड का पारायण भी चलता रहा।

आयोजन के मुख्य आचार्य उलीमिरी सोमायजुलू ने जताया कि वाल्मीकि रामयण के अरण्यकांड को मोक्ष   कांड भी कहा जाता है। कारण कि इस सर्ग विशेष में श्री राम प्रभु ने कोटिशा वर्षों से उदार की प्रतीकक्ष कर रहे ऋषि-मुनियों सहित विराध व कबंध जैसे राक्षसों को सद्गति प्रदान की इनमें भी  बड़भागी रहे जटायु जिन्होने वह सद्गति प्राप्त की जो राजा दशरथ को भी प्राप्त नहीं हुई। रधुकुल तिलक ने अपने हाथों से पक्षी राज की अन्त्येष्टि ही नहीं उन्हे पिंड तक प्रदान किया।

आचार्य सोमायाजुल ने बताया कि रामायण के आरण्यकांड के श्रवण मात्र से जीव को सहज ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।

उत्सव के यज्ञ मंडप मे नियमित अनुष्ठानों के साथ संपादान के साथ रविवार को सुयोग को देखते हुए पवित्र मंत्रों से सूर्यदेव को अर्घ्य  प्रदान किया गया। सभी अनुष्ठानों को विद्वानों के निर्देशन में उत्सव के मुख्य यजमान तथा श्री रामतारक आंध्र आश्रम के प्रबंध न्यासी वी वी सुंदर शास्त्री ने किया। संयोजन आश्रम के प्रबंधक वी वी-सीतराम ने किया।

इसमें मुख्य रूप से श्री सी वी बी सुब्रह्मण्यम,अन्नदानम चिदम्बर शास्त्री, डॉ मिथुना पंडित, बुधा शर्मा, शिव शर्मा, आदि लोग उपस्थित रहे।

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