
वाराणसी। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार की अध्यक्षता में खरीफ 2025 अभियान को सफल बनाने, कृषकों को निर्धारित दर पर समय से उर्वरको की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने हेतु उर्वरक के क्रय, विक्रय एवं उपलब्धता आदि के संबंध में शनिवार को वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से समीक्षा किया गया। जिसमें मुख्य विकास अधिकारी, उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, जिला प्रबंधक पी0सी0एफ0 एवम् क्षेत्र प्रबंधक इफको, प्रबंध जिला सहकारी बैंक, वाराणसी द्वारा प्रतिभाग किया गया।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने सहायक निबंधक सहकारिता को निर्देशित किया कि जनपद के समस्त साधन सहकारी समितियां रोस्टर के अनुसार समय से खोली जाये तथा सभी समितियों पर उर्वरकों की उपलब्धता प्रतिदिन बनी रहे, किसी भी स्थिति में समिति पर मुख्य उर्वरक यूरिया एवं डीएपी की उपलब्धता शून्य नहीं होनी चाहिए। इस अवसर पर जिलाधिकारी द्वारा जिला सहकारी बैंक की जीएम को निर्देशित किया गया है कि समितियां के माध्यम से बैंकों में जो धनराशि एवं चेक जमा किए जा रहे हैं, उनको नियत समय पर संबंधित के खाते में ट्रांसफर किया जाए, जिससे उर्वरकों की आपूर्ति आबाद रूप से बनी रहे, इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल को निर्देशित किया गया है कि नियमित रूप से सभी समितियों एवं निजी क्षेत्र में उर्वरकों की उपलब्धता की तथा बैंकों में जमा धनराशि की समीक्षा कर, प्रतिदिन प्रगति से अवगत कराते रहे। जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह को निर्देशित किया कि जनपद के प्रत्येक क्षेत्र में उर्वरकों के वितरण पर सतत् निगरानी रखे निर्धारित दर से अधिक बिक्री, कालाबाजारी, डाइवर्जन या जमाखोरी की कोई शिकायत यदि आती है, तो तत्काल संबंधित के विरुद्ध उर्वरक गुण नियंत्रण के अधीन प्राथमिकी दर्ज कराते हुए नियमानुसार अग्रेत्तर कार्रवाई सुनिश्चित किया जाय।।
इस अवसर जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने पीएम प्रमाण योजनांतर्गत रासायनिक उर्वरकों की खपत को कम करने तथा वैकल्पिक उर्वरक गोबर खाद, कंपोस्ट खाद, बर्मी कंपोस्ट, हरी खाद, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी को बढ़ावा देने हेतु किसान भाइयों को अवगत कराया कि जनपद के प्रत्येक क्षेत्र की मृदा में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा कम होने के कारण जो रासायनिक उर्वरक का प्रयोग किया जाता है, उसकी मात्र 35 से 40 फीसदी मात्रा फसलों के प्रयोग में आती है शेष मात्रा का उपयोग मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की कमी के कारण नहीं हो पता है। किसान भाइयों से अपील किया गया है कि अपनी मिट्टी के सेहत के सुधार हेतु फसल चक्र अपनाए, साथ ही हरी खाद, गोबर खाद, कंपोस्ट खाद, बर्मी कंपोस्ट, जीवामृत, घन जीवामृत आदि जैविक गतिविधियों का प्रयोग करे। इससे मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा बढ़ेगी, जिससे मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होगा तथा रासायनिक उर्वरकों की उपयोग क्षमता में वृद्धि होगी। जिससे कम मात्रा में रासायनिक उर्वरको को प्रयोग करना पड़ेगा, जिससे खेती की लागत में कमी आएगी तथा मिट्टी एवं पर्यावरण के स्वास्थ्य में सुधार होगा, साथ ही जो उत्पाद प्राप्त होगा वह उच्च गुणवत्ता का होगा, जिसकी कीमत किसानो को बाजार में अधिक मिलेगी इससे आप किसान भाईयों के आय में भी होगी।










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