वाराणसी। विश्व पर्यटन सप्ताह के अवसर पर वाराणसी टूरिज्म गिल्ड द्वारा आयोजित सप्ताहव्यापी आयोजन के अंतर्गत मंगलवार को कैंटोनमेंट स्थित अर्बन फूड कोर्ट में बनारस परिचय कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्य ने बनारस की संस्कृति, परंपरा, खानपान और पहचान पर विचार रखते हुए कहा की बनारस का अल्हड़पन ही बनारस की आत्मा है। यहाँ शिव को खोजने के लिए किसी खास जगह जाने की जरूरत नहीं क्योंकि पूरी नगरी ही शिव के स्वरूप में रची-बसी है। बनारसी पान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे पान, सुपारी और चुना मिलने के बाद लाल रंग निकलता है, वैसे ही बनारस जीवन को अपने रंग में रंग देता है। यही रंग इस नगरी की असली पहचान है।

काशी के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि बनारस ने कभी अपने नाम को महत्व नहीं दिया।

प्राचीन काल से लेकर अब तक इसके 29 नाम बदले गए। 1952 में इसे आधिकारिक रूप से वाराणसी का दर्जा मिला। इससे पहले यह आनंदकानंद, रुद्रवास, त्रिकटंक, मोक्षपुरी, शिवनगर जैसे नामों से जाना जाता था।

उन्होंने यह भी कहा कि बनारस की गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक है शब्द जाएदा। इस शब्द में इतना प्रेम और अपनापन है कि कोई भी बड़ा विवाद हो, यह एक ही झटके में उसे शांत कर देता है।

इस मौके पर इंडिया टूरिज़्म के असिस्टेंट डायरेक्टर पावस प्रसून भी विशिष्ट रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत गिल्ड के अध्यक्ष सुभाष कपूर एवं सचिव सौरभ पाण्डेय ने किया। संचालन जैनेंद्र राय एवं धन्यवाद ज्ञापन रंजीत श्रीवास्तव ने दिया। कार्यक्रम में विक्रम मेहरोत्रा, अजय गुप्ता, प्रदीप नारायण सिंह, विकास जायसवाल, मजीद खान आदि पर्यटन क्षेत्र से जुड़े ट्रैवल एजेंट, गाइड, फैसिलिटेटर और होटल व्यवसायी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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