वाराणसी। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही स्थित स्मारक परिसर में प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के 1777वें दिवस पर प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘मनुष्य का परम धर्म’ का पाठ आयुषी वर्मा ने किया। इस अवसर पर ट्रस्ट के संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि प्रेमचंद इस कहानी के माध्यम से स्पष्ट करते हैं कि जो धर्म मनुष्य को मनुष्य से दूर करे, वह धर्म नहीं हो सकता। प्रेम, करुणा, दया, सहानुभूति और सेवा ही मनुष्य के वास्तविक धर्म हैं।

डा. मनोहर लाल ने कहा कि ‘मनुष्य का परम धर्म’ प्रेमचंद की वैचारिक परिपक्वता और सामाजिक चेतना का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो आज के समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक है। कार्यक्रम में प्रो. विनय, यश वर्मा, उत्कर्ष वर्मा, अभिषेक मौर्य, रतनशीला आदि थे। कार्यक्रम का संचालन अशोक पाण्डेय ने किया, स्वागत यश वर्मा तथा धन्यवाद ज्ञापन सुरेश चंद्र दूबे ने किया।

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