
वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के ज्योतिष शास्त्र के उद्भट विद्वान् एवं कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि माघ कृष्ण अमावस्या, जिसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है, वर्ष 2026 में ज्ञान, दान, स्नान तथा धार्मिक अनुष्ठानों की दृष्टि से विशेष महत्त्व की सिद्ध हो रही है। ज्योतिषीय एवं धर्मशास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार यह पुण्यतिथि इस वर्ष अत्यन्त श्रेष्ठ योगों से युक्त है।
कुलपति प्रो शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय, वाराणसी के ज्योतिष विभाग द्वारा प्रदत्त शास्त्रीय विवेचन के अनुसार, मौनी अमावस्या का आरम्भ दिनांक 17/18 जनवरी 2026 की मध्यरात्रि 12:04 बजे से होगा, जबकि इसकी समाप्ति 18/19 जनवरी 2026 की मध्यरात्रि 1:22 बजे होगी। इस प्रकार अमावस्या की सम्पूर्ण अवधि 25 घंटे 18 मिनट की रहेगी।
धर्मशास्त्रों में प्रतिपादित सूत्र—
“उदये याऽतिभास्करः सा तिथिः सकला ज्ञेया ज्ञानदानजपादिषु”
के आलोक में यह स्पष्ट होता है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है, वही तिथि ज्ञान, दान, जप, तप एवं स्नानादि के लिए पूर्ण फलदायी मानी जाती है। इस शास्त्रीय प्रमाण के अनुसार दिनांक 18 जनवरी 2026 को सम्पूर्ण दिन मौनी अमावस्या के पुण्य कर्म सम्पन्न किए जा सकते हैं।
कुलपति प्रो शर्मा ने बताया कि इसके अतिरिक्त, अमावस्या का प्रभाव 19 जनवरी 2026 को सूर्योदय के पश्चात दो घटी (48 मिनट), अर्थात् प्रातः 7:28 बजे तक बना रहेगा। अतः इस अवधि में भी स्नान, दान एवं जपादि कर्म विशेष फलप्रद होंगे।
*शुभ-अशुभ काल का वर्गीकरण*
ज्योतिषीय दृष्टि से इस अमावस्या के विभिन्न काल इस प्रकार निर्धारित किए गए हैं जिसमें
• 17/18 जनवरी (रात्रि 12:04 से प्रातः 5:58) — मध्यम
• 18 जनवरी (प्रातः 5:59 से मध्यान्ह 11:55) — उत्तम
• 18/19 जनवरी (मध्यान्ह 11:56 से सायं 4:39) — मध्यम
• 19 जनवरी (प्रातः 5:58 से 7:28)_ उत्तम
उन्होंने बताया कि
विशेष रूप से 18 जनवरी को प्रातःकाल से मध्यान्ह तक का समय स्नान-दान एवं धार्मिक अनुष्ठानों हेतु अत्यन्त श्रेष्ठ माना गया है।
*विशेष ज्योतिषीय योग*
कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि इस वर्ष मौनी अमावस्या को एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग भी प्राप्त हो रहा है। मकर राशि में सूर्य एवं चन्द्रमा का संयोग उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में दिनांक 18 जनवरी 2026 को सायं 4:41 बजे से रात्रि 1:22 बजे तक रहेगा। इस अवधि में लगभग 8 घंटे 30 मिनट का ‘अमृत स्नान काल’ प्राप्त हो रहा है।
विशेषतः सायं 4:41 से रात्रि 9:23 बजे तक ‘हर्षण योग’ का निर्माण हो रहा है, जो स्नान, दान, जप एवं आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यन्त लाभप्रद एवं पुण्यवर्धक माना गया है।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस पावन अवसर पर मौन व्रत का पालन, गंगा स्नान, तिल-दान, वस्त्र-दान, अन्न-दान तथा ब्राह्मण सेवा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
