वाराणसी। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली (स्मारक) लमही में प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट द्वारा आयोजित सुनो मैं प्रेमचंद कार्यक्रम के अंतर्गत प्रेमचंद की चर्चित कहानी ‘नया विवाह’ का पाठ किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रेमचंद के साहित्य में निहित सामाजिक यथार्थ, स्त्री-जीवन और विवाह संस्था पर गंभीर विमर्श हुआ। इस अवसर पर प्रोफेसर श्रद्धानंद ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी कथा-साहित्य के ऐसे यथार्थवादी लेखक हैं जिन्होंने समाज की रूढ़ियों, स्त्री-पीड़ा, नैतिक दुविधाओं और मध्यवर्गीय जीवन की विडंबनाओं को अत्यंत संवेदनशीलता से चित्रित किया। उन्होंने बताया कि ‘नया विवाह’ स्त्री-जीवन, विवाह संस्था और पुरुषसत्तात्मक मानसिकता की गहरी परतों को उजागर करने वाली एक मार्मिक कथा है। डॉ. नसीमा निशा ने कहानी ‘नया विवाह’ का प्रभावशाली पाठ किया। उन्हें संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद, निदेशक राजीव गोंड, आनंद कृष्ण माशूम और रामजतन पाल ने सम्मानित गया। आनंद कृष्ण माशूम ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ‘नया विवाह’ में प्रेमचंद विवाह को केवल सामाजिक अनुबंध नहीं, बल्कि मानसिक और नैतिक जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत करते हैं। कहानी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या विवाह केवल पुरुष की सुविधा के लिए है और क्या स्त्री को हर परिस्थिति में समझौता ही करना होगा। इस अवसर पर रोहित गुप्ता, सीमा अस्थाना, अश्विवित दुबे, नमन श्रीवास्तव, सुरेश चंद्र दुबे, अरविंद विश्वकर्मा, प्रांजल श्रीवास्तव, वाचस्पति चतुर्वेदी, अशोक पाण्डेय, शंकर श्रीवास्तव, यश वर्मा, अभिषेक मौर्य, सूर्यदीप कुशवाहा, राहुल यादव, विपनेश सिंह, संजय श्रीवास्तव आदि थे। संचालन आयुषी दुबे, स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन रोहित गुप्ता ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *