
वाराणसी। उत्तर प्रदेश सरकार में आयुष विभाग की डायरेक्टर जनरल चैत्रा वी. ने आज केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ स्थित सोवा-रिग्पा अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान संस्थान के कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा ने उन्हें खतक एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वागत किया। निरीक्षण के दौरान श्रीमती चैत्रा वी. ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का उद्देश्य देश में सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने सोवा-रिग्पा जैसी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार पर बल दिया। सोवा-रिग्पा विभाग के संकाय प्रमुख प्रो. दमदुल ने बताया कि सोवा-रिग्पा, जिसे तिब्बती चिकित्सा पद्धति भी कहा जाता है, प्राकृतिक तरीकों, संतुलित आहार, व्यवहार संशोधन और पारंपरिक औषधियों के माध्यम से रोगों को जड़ से समाप्त करने तथा शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर आधारित है। उन्होंने कहा कि यह पद्धति अस्थमा, अर्थराइटिस और ब्रोंकाइटिस जैसे पुराने रोगों के उपचार में प्रभावी मानी जाती है। संस्थान के अध्यक्ष प्रो. टाशी दवा ने हर्बल दवाओं के पारंपरिक महत्व और उनके सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी। इस अवसर पर उपकुलसचिव डॉ. हिमांशु पाण्डेय, सहायक कुलसचिव श्री सुनील कुमार, डॉ. सुमिल तिवारी, डॉ. ए.के. राय सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
