
अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र में पांच दिवसीय कार्यशाला शुरू
वाराणसी । सोमवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में *“ट्रांसफॉर्मिंग पेडागॉजी इन हायर एजुकेशन: साइंसेज़, मैथमेटिक्स, सोशल साइंसेज़, ह्यूमैनिटीज़ एंड मैनेजमेंट.”* विषय पर पाँच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम का प्रारंभ डॉ. राजा पाठक द्वारा मंगलाचरण से हुआ। इसके उपरांत दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती व महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. सी. बी. शर्मा, कुलपति, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग तथा मुख्य वक्ता प्रो. चंदकिरण सलूजा, पूर्व प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने की। प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान) आईयूसीटीई, वाराणसी ने स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन राज सिंह, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने किया । कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुशाग्री सिंह, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने किया।
मुख्य अतिथि प्रो. सी. बी. शर्मा, कुलपति, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग ने कहा कि उच्च शिक्षा की शिक्षण पद्धति पर हमारे पास बहुत कम सामग्री उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा सत्य की खोज है और इसकी शिक्षण पद्धति आत्मनिर्भरता पर आधारित होती है। उन्होंने ने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा की शिक्षण पद्धति विभिन्न तरीकों से शिक्षण को संभव बनाती है। मुख्य वक्ता प्रो. चंदकिरण सलूजा, पूर्व प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली ने अपने संबोधन में कहा कि प्रभावी शिक्षण पद्धति विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया और आत्मचिंतन के आधार पर विकसित होती है। उन्होंने ‘पंचकोश’ की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि समग्र शिक्षा व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को संतुलित रूप से आगे बढ़ाती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सीखने की प्रक्रिया में ‘श्रवण, मनन और निदिध्यासन’ अत्यंत महत्वपूर्ण चरण हैं, जो ज्ञान को गहराई से आत्मसात करने में सहायक होते हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने ट्रांसफॉर्मिंग पेडागॉजी की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा का शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया और आत्म-चिंतन के आधार पर उपयुक्त शिक्षण पद्धतियों का चयन और प्रयोग करता है। प्रो. सुनील कुमार सिंह, शिक्षा संकाय, बीएचयू, वाराणसी ने “उच्च शिक्षा में विज्ञान शिक्षण की वर्तमान समस्याएँ एवं उनके संभावित समाधान” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विज्ञान शिक्षण में उभरती चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए व्यवहारिक एवं नवोन्मेषी समाधान सुझाए।
अंतिम दो सत्रों में प्रतिभागियों ने विषय-आधारित समूहों में शिक्षण रणनीतियों के निर्माण पर चर्चा की तथा अनुशासन-विशिष्ट आवश्यकताओं का मानचित्रण करते हुए कार्य की रूपरेखा तैयार किया गया। इन सत्रों में सक्रिय सहभागिता के माध्यम से व्यावहारिक और क्रियान्वित करने योग्य सुझाव सामने आए।
इस अवसर पर डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. विनोद कुमार सिंह, डॉ. उदय प्रताप सिंह सहित प्रमुख शिक्षाविद्, शोध छात्र, तथा केंद्र के अन्य समस्त सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन आईयूसीटीई के सभी संकाय सदस्यों द्वारा किया जा रहा है।
