प्रगति समीक्षा और रणनीतिक योजना पर विशेष जोर

 

वाराणसी। अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क) की 9वीं समन्वय समिति की बैठक गुरुवार को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, नई दिल्ली में सम्पन्न हुई। बैठक में आइसार्क की स्थापना (2017) से अब तक की प्रगति और उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए, अगले चरण (2027–32) के लिए रणनीतिक प्राथमिकताओं और रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता इरी की महानिदेशक एवं समन्वय समिति की अध्यक्ष डॉ. इवोन पिंटो ने की तथा सह-अध्यक्षता भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने की। बैठक में समिति के सभी सदस्य भी उपस्थित रहे, जिनमें नेपाल के कृषि एवं पशुपालन विकास मंत्रालय के सचिव डॉ. राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, बांग्लादेश कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री एस. एम. अंसारुज्जमां, उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष सचिव (कृषि) लाल बहादुर यादव, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव (बीज) अजीत कुमार साहू, नेपाल के कृषि एवं पशुपालन विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. राम कृष्ण श्रेष्ठ, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. देवेंद्र कुमार यादव, राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक मनोज कुमार, फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया के महानिदेशक डॉ. परेश वर्मा, इरी के एशिया निदेशक डॉ. जोंगसू शिन, आइसार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह तथा इरी एवं आइसार्क के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अधिकारीगण शामिल थे।

बैठक की शुरुआत में आइसार्क के निदेशक एवं समन्वय समिति के संयोजक डॉ. सुधांशु सिंह ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और बैठक के एजेंडा की जानकारी दी। अपने संबोधन में भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने आइसार्क की स्थापना से अब तक की प्रगति और उपलब्धियों की सराहना की तथा दक्षिण एशिया में जलवायु-अनुकूल और प्रौद्योगिकी-आधारित धान प्रणालियों को आगे बढ़ाने में इसकी नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने आइसार्क से पोषण, फसल अवशेष प्रबंधन तथा मिलिंग प्रक्रिया के दौरान कम टूटन वाली संकर धान की किस्मों पर अनुसंधान को और सुदृढ़ करने का आग्रह किया।

इरी की महानिदेशक डॉ. इवोन पिंटो ने समिति का संचालन करते हुए आइसार्क के विकास को दक्षिण एशिया में समावेशी, जलवायु-अनुकूल और पोषण-संवेदनशील कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए एक मॉडल केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने जलवायु-अनुकूल धान प्रणालियों के विकास हेतु इरी की प्रमुख प्राथमिकताओं और रणनीतियों को भी रेखांकित किया।

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव (बीज) अजीत कुमार साहू ने आइसार्क की स्थापना से अब तक किसानों की आय बढ़ाने और खेत स्तर पर जलवायु-अनुकूल तकनीकों के विस्तार में इसके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आइसार्क के कार्यक्रमों को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और मंत्रालय की राष्ट्रीय पहलों के साथ एकीकृत करने का सुझाव भी दिया। इसके उपरांत आइसार्क के वैज्ञानिकों ने केंद्र की अनुसंधान उपलब्धियों, वर्ष 2025 की प्रमुख गतिविधियों तथा अगले चरण के लिए रणनीतिक रोडमैप पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं। प्रस्तुतियों में आठ प्रमुख विषयगत क्षेत्रों में हुई प्रगति को रेखांकित किया गया, जिनमें नारेस-संस्थानों के सहयोग से 125 धान किस्मों के विकास में समर्थन, बीज प्रणाली को सुदृढ़ करना, विभिन्न राज्यों में धान की सीधी बुआई (डीएसआर) और बेहतर प्रबंधन पद्धतियों का विस्तार, डिजिटल एवं भू-स्थानिक उपकरणों का विकास, धान की गुणवत्ता और मूल्य संवर्धन में प्रगति तथा संस्थागत क्षमता विकास शामिल हैं।

प्रस्तुतियों के पश्चात समिति के सदस्यों ने आइसार्क की उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए सराहना की और अगले चरण की प्राथमिकताओं को भारत, नेपाल और बांग्लादेश के राष्ट्रीय एजेंडों के अनुरूप सुनिश्चित करने हेतु रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रमुख सुझावों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रजनन और बीज प्रणालियों को गति देना, प्रीमियम और पोषण-संवेदनशील धान मूल्य श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करना, कृत्रिम बुद्धिमता आधारित डिजिटल सलाह और एमआरवी (निगरानी, रिपोर्टिंग व सत्यापन) प्रणालियों को बढ़ावा देना, कम उत्सर्जन वाली मशीनीकृत डीएसआर प्रणालियों का विस्तार, पुनर्योजी कृषि और मृदा स्वास्थ्य पहलों को आगे बढ़ाना, क्षमता विकास और साझेदारी को मजबूत करना तथा दक्षिण-दक्षिण सहयोग को और सुदृढ़ करना शामिल था।

बैठक का समापन इरी के एशिया क्षेत्रीय निदेशक डॉ. जोंगसू शिन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें आइसार्क के मिशन और दीर्घकालिक रणनीतिक विकास के प्रति निरंतर संस्थागत समर्थन की पुष्टि की गई।

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