
वाराणसी। आपातकालीन परिस्थितियों की भयावहता हो या त्योहारों का उल्लास, मानसून की तेज़ बौछारें हों या शीत ऋतु की कठोरता—राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के बचावकर्मी अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की परवाह किए बिना हर परिस्थिति में मानव जीवन की सुरक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहते हैं। आपदा की घड़ी में उनका साहस, समर्पण और त्वरित निर्णय क्षमता ही असंख्य जिंदगियों को सुरक्षित करती है।
बचाव कार्मिकों की अत्यंत कठिन एवं चुनौतीपूर्ण कार्यप्रणाली को ध्यान में रखते हुए आज वाहिनी मुख्यालय में उप महानिरीक्षक श्री मनोज कुमार शर्मा के दिशा-निर्देशन में मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष पहल का उद्देश्य बचाव कार्मिकों की पेशेवर दक्षता को सुदृढ़ करना, व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करना, बेहतर तनाव प्रबंधन के उपायों से अवगत कराना तथा उनके मानसिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाना था।
कार्यक्रम में प्रख्यात मनोवैज्ञानिक एवं मानवर्धन सोशल मीडिया फाउंडेशन की निदेशक डॉ. संहिता चौधरी ने बचाव कार्मिकों से संवाद स्थापित किया। उन्होंने कार्मिकों की समस्याओं और अनुभवों को गंभीरता से सुना तथा आपदा जैसे संवेदनशील और दबावपूर्ण वातावरण में कार्य करते समय मानसिक दृढ़ता, सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने के प्रभावी उपाय साझा किए।
डॉ. चौधरी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि पेशेवर सफलता और टीम की कार्यकुशलता का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने ध्यान, नियमित संवाद, भावनात्मक अभिव्यक्ति और सहकर्मी सहयोग को मानसिक सुदृढ़ता के प्रमुख स्तंभ बताया। कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की पहलें बचाव कार्मिकों को मानसिक रूप से अधिक सशक्त बनाएंगी और वे भविष्य में भी आपदा की हर चुनौती का सामना और अधिक आत्मविश्वास एवं दक्षता के साथ कर सकेंगे
