
वाराणसी। वसंत कन्या महाविद्यालय के क्लब रंगमंच ने दो- दिवसीय कार्यक्रमों में विश्व रंगमंच दिवस और क्लब की पहली वर्षगांठ को विविध आयोजनों के साथ उत्साहपूर्वक मनाया।
पहले दिन एकांकी, एकल अभिनय और लघु फिल्म वर्गों में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
दूसरे दिन, विजेता प्रविष्टियों को पुरस्कारों से सम्मानित कर रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया गया। दूसरे दिन के कार्यक्रमों में आकर्षण का केंद्र, क्लब की नाट्य प्रस्तुति ‘जीवा, तुम कब आओगे रही’ जिसे सैमुअल बैकेट के मूल फ्रेंच नाटक ‘वेटिंग फॉर गोडो’ पर आधारित कर, समकालीन भारतीय समाज और चिंतन के ढांचे में रचनात्मक युक्तियुक्तता दी गई। लेखिका डॉक्टर सुप्रिया सिंह ने कहा कि यह नाटक मात्र कथानक की प्रस्तुति नहीं चिंतन से जोड़ने का नजरिया है जिसे रंगमंच पर व्यंग्यात्मक शैली में दिखाना एक वास्तविक चुनौती थी।
कलाकारों, अदिति मिश्रा, दिया मिश्रा,आद्रिका अग्रवाल, रश्मि, लतिका बिष्ट, अदिति, और प्राची की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि जीवंत और प्रभावपूर्ण अभिनय ने इस चुनौती को सरल सहज कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत शिव तांडव स्त्रोत पर छात्रा नीनू की आकर्षक नृत्य प्रस्तुति से हुई जिसके बाद सचिव रंगमंच, अदिति मिश्रा ने क्लब की साल भर की उपलब्धियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने कहा कि महाविद्यालय में उत्कृष्ट नाट्य प्रस्तुतियों का सुदीर्घ इतिहास रहा है।
इस क्रम में क्लब के रूप में रंगमंच का गठन एक सुखद दौर की वापसी के रूप में देखा जाना चाहिए। अपने आशीर्वाद संबोधन में प्रबंधिका श्रीमती उमा भट्टाचार्या ने थिएटर को अनुभव और अभिव्यक्ति के बीच का सशक्त संवाद बताया। इस प्रक्रिया में जिस तरह समाज को शामिल होने का अवसर मिलता है वह विचारों के प्रसार का भी सबसे प्रभावशाली माध्यम है। अतिथि वक्ता प्रोफेसर रंजन कुमार, छात्र अधिष्ठाता काशी हिंदू विश्वविद्यालय, ने थिएटर के प्रति समाज की परिवर्तित दृष्टि की प्रशंसा की और कहा कि व्यक्तित्व के विकास में थिएटर और अभिनय की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने महाविद्यालय की प्रशंसा करते हुए कहा कि काशी के उच्च शिक्षण संस्थानों में नाट्य विभाग की कमी चिंतन का विषय है ऐसे में ‘रंगमंच क्लब’ एक अनुकरणीय प्रयास है। उन्होंने छात्राओं के अभिनय क्षमता की खूब प्रशंसा की।
विशिष्ट अतिथि, ख्यात रंगकर्मी, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की प्रोफेसर शुभ्रा वर्मा ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी प्रस्तुति रंगमंच के प्रति समर्पण की बेहतरीन परिचायक है। यही समर्पण उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में बेहतर बनने की प्रेरणा देगा। उन्होंने नाट्य प्रस्तुति को अभिनय, स्टेज क्राफ्ट और साउंड-लाइट जैसी तकनीकी कुशलताओं की दृष्टि से भी सराहा और भविष्य में रंगमंच की योजनाओं से जुड़कर कार्य करने का प्रस्ताव दिया। इस अवसर पर छात्राओं द्वारा तैयार लघु फिल्म ‘रुदाली’ की स्क्रीनिंग भी की गई जिसे रुचिता, गौरी तथा उनकी टीम ने तैयार किया था।
कार्यक्रम में सूत्रधार की भूमिका में थीं, कृत्तिका और सृष्टि थी। धन्यवाद कार्यक्रम की संयोजिका डॉक्टर नैरंजना श्रीवास्तव ने किया।
इस अवसर पर आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसर अरुण जैन भी उपस्थित रहे। महाविद्यालय के आइ क्यू एक सी तथा अंग्रेजी विभाग के सहयोग से आयोजित रंगोत्सव में प्राध्यापकों और छात्राओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन को सफल बनाया।
