
वाराणसी। लंका- नरिया स्थित रामनाथ चौधरी शोध संस्थान के सभागार में भारत की भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी तथा बनारस के पहले विधान परिषद सदस्य बाबू प्रसिद्ध नारायण सिंह की जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई ।
इस अवसर पर “राष्ट्र निर्माण में किसानो की भूमिका” विषय पर संगोष्ठी का भी आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ चंद्रशेखर जी एवं बाबू प्रसिद्ध नारायण सिंह के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन से हुआ ।
इस अवसर पर उपस्थित सभी ने चंद्रशेखर जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके 99 वे जयंती पर अपना श्रद्धा सुमन अर्पित किया। चंद्रशेखर फाउंडेशन तथा बाबू प्रसिद्ध नारायण सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में कार्य करने वाले 51 व्यक्तियों को सामाजिक उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया ।
इस अवसर पर समारोह की अध्यक्षता करते हुए बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री जमा खान ने कहा कि चंद्रशेखर जी उस राष्ट्रीय दृष्टिकोण के व्यक्ति थे जिन्होंने राजनीतिक पटल पर उत्तर प्रदेश तथा बिहार दोनों के राजनीतिक भावनाओं का कई दशकों तक प्रतिनिधित्व किया। उनके दौर का हर राजनीतिक कार्यकर्ता किसी न किसी रूप में चंद्रशेखर के आचरण का अनुयायी था ।
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में गैर कांग्रेसी दलों की सरकार के जितने भी नेता हुए उन सभी ने किसी न किसी कालखंड में भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पीछे खड़े रहकर राजनीतिक प्रशिक्षण प्राप्त किया ।
उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर जी किसानों को भारत की संरचना की रीढ़ मानते थे। उन्होने बाबू प्रसिद्ध नारायण सिंह को याद करते हुए कहा कि बनारस का उदय प्रताप महाविद्यालय उनके प्रयासों तथा व्यापक सोच का प्रत्यक्ष प्रमाण बनारस के पहले विधान परिषद सदस्य के रूप में उनकी भूमिका युगों युगों तक याद की जाएगी ।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार की परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर जी ने संसदीय राजनीति को दलीय निष्ठा से ऊपर ले जाकर राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के साधन के रूप में देखते थे।
उन्होंने सत्ता को ठोकर मार कर संघर्ष का रास्ता चुना। जिसके कारण आपातकाल के बाद संपूर्ण क्रांति के दौर में जयप्रकाश नारायण के बाद वह सबसे आकर्षक नेता के रूप में प्रतिष्ठित हुए।
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में जब चंद्रशेखर जी ने शपथ ग्रहण किया तब पूरा भारत युवा आंदोलन और हिंसा की आग में जल रहा था किंतु चंद्रशेखर जी के समन्वयकारी व्यक्तित्व और भेदभाव रहित राजनीति के प्रभाव में तत्काल शांति स्थापित हो गया। उनका सारा जीवन गांव और किस के विकास के लिए संघर्ष करने में बीता।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडे ने कहा कि वाणी और कर्म की एकरूपता चंद्रशेखर जी की राजनीति का मुख्य गुण था उनके लिए आचरण और सिद्धांत एक दूसरे के पूरक थे । वे किसानों के हक के प्रखर प्रवक्ता थे आम आदमी के भावनाओं की समझ तथा उसके अनुरूप नीतियों का समर्थन चंद्रशेखर जी की राजनीतिक जीवन का मूल तत्व था। उनके विचारों और क्रियाकलापों में आचार्य नरेंद्र देव और महात्मा गांधी के व्यक्तित्व की स्पष्ट छाप दिखाई देती है।
विशिष्ट अतिथि सुशील सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर जी ने कभी अपने जीवन में वोट बैंक की राजनीति नहीं की वे लोकप्रिय राजनीति के बजाय लोककल्याण की राजनीति के साधक थे।
मुख्य वक्ता भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडे ने कहा कि देश में संपूर्ण क्रांति मुलत: जयप्रकाश नारायण और चंद्रशेखर क्रांतिकारी कदमों का परिणाम था। चंद्रशेखर जी ने जयप्रकाश और श्रीमती गांधी के बीच मध्यस्थ ता करते हुए समझौते का भी प्रयास किया था
अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान चंद्रशेखर फाउंडेशन के अध्यक्ष हिमांशु सिंह ने किया धन्यवाद ज्ञापन काशी हिंदू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ अरविंद कुमार शुक्ला ने किया समारोह का संचालन काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र नेता अभिषेक सिंह ने किया इस अवसर पर प्रमुख रूप से मोहन सिंह, प्रोफेसर आनंद दीपायम, भुनेश्वर द्विवेदी, रत्नाकर त्रिपाठी, चौधरी राजेंद्र, अजीत सिंह, भूपेंद्र प्रताप सिंह, पंकज पाठक, महेंद्र सिंह, अजय सिंह, मनीष उपाध्याय, सुभाष चंद्र सिंह गुड्डू, कान्हा पांडे, करण हृदयानंद यादव, धर्मेंद्र सिंह, अजीत सिंह, संयोजक किनाराम मठ पंकज पाठक, ब्रह्मानंद पाठक ,अन्नपूर्णानंद पांडे, संजय राय,नागेंद्र तिवारी, अभय सिंह, मिक्कू विनय शंकर सिंह पिंटू, मुकेश तिवारी, आयुष मिश्रा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
