
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक – कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा।
वाराणसी।उत्तर प्रदेश शासन के संस्कृति अनुभाग द्वारा जारी निर्देशों के क्रम में “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के अंतर्गत राज्य स्तरीय/ज्योतिर्लिंग आयोजन के अवसर पर जनपदीय कार्यक्रमों की श्रृंखला में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के श्रमणविद्या संकाय स्थित संस्कृत विद्या विभाग द्वारा एक विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता, सनातन चेतना एवं आध्यात्मिक गौरव का प्रतीक है। भगवान शिव की आराधना एवं वैदिक मंत्रोच्चार हमारी प्राचीन ज्ञान परम्परा की जीवंत धरोहर हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति, वैदिक मूल्यों एवं आध्यात्मिक परम्पराओं से आत्मीय रूप से जुड़े।
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति, वैदिक ज्ञान एवं आध्यात्मिक परम्पराओं के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार हेतु निरंतर कार्य कर रहा है।”
कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर स्थित शिवालय में वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक, शिवस्तुति तथा विभिन्न वैदिक मंत्रों का सामूहिक जाप किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परम्परा एवं सनातन वैदिक संस्कारों के प्रति श्रद्धा एवं जागरूकता उत्पन्न करना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रमण विद्या संकाय प्रमुख प्रो. रमेश प्रसाद ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भगवान शिव भारतीय अध्यात्म, तप, करुणा एवं लोकमंगल की महान परम्परा के प्रतीक हैं। रुद्राभिषेक एवं वैदिक मंत्रोच्चार जैसे आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा से जुड़ने का माध्यम हैं। युवाओं को सनातन परम्पराओं, वैदिक संस्कारों एवं भारतीय जीवन मूल्यों के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का समन्वयन एवं संचालन डॉ. रविशंकर पाण्डेय द्वारा किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अतिथि अध्यापक डॉ. बालेश्वर झा, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. पूनम, स्वामी विष्णु बल्भानन्द सहित विभाग के अनेक विद्यार्थी, शोधार्थी, कर्मचारी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने श्रद्धा एवं उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए वैदिक परम्पराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया।









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