सेवा, सह-अस्तित्व और करुणा भारतीय जीवन-दर्शन की मूल भावना :- कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा

‘जीवेषु दया’ भारतीय संस्कृति का सर्वोच्च नैतिक मूल्य – डॉ. रविशंकर पाण्डेय

 

वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या विभाग एवं ए.वी.पी. के कार्यकर्ताओं द्वारा विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में भीषण ग्रीष्म ऋतु से व्याकुल पशु-पक्षियों के संरक्षण एवं सेवा हेतु “सकोरा अभियान” के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थलों पर सकोरे एवं शीतल जल-पात्र स्थापित किए गए।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पशु-पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों एवं समाज में जीव-दया, पर्यावरण संरक्षण तथा संवेदनशील सह-अस्तित्व की भावना को जागृत करना भी रहा। विद्यार्थियों ने जल-पात्रों में निरंतर स्वच्छ जल उपलब्ध कराने का उत्तरदायित्व भी ग्रहण किया।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति एवं समस्त प्राणियों के प्रति करुणा, संरक्षण और सह-अस्तित्व की भावना को अत्यंत महत्त्व दिया गया है।

उन्होंने कहा कि “पशु-पक्षियों एवं समस्त जीवों के प्रति संवेदना ही भारतीय जीवन-दर्शन की मूल आत्मा है। भीषण गर्मी के इस समय में जीवों के लिए जल की व्यवस्था करना केवल सेवा नहीं, अपितु मानवता एवं संस्कार का परिचायक है।” उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसे सेवा एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी अभियानों को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान भी किया।

इस अवसर पर डॉ. रविशंकर पाण्डेय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में ‘जीवेषु दया’ की भावना को सर्वोच्च नैतिक मूल्यों में स्थान प्राप्त है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण एवं जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे सेवा-प्रधान कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, करुणा एवं मानवीय मूल्यों का विकास करते हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों एवं सहयोगियों का उत्साहवर्धन करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के जनहितकारी अभियानों को निरंतर संचालित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

संस्कृत विद्या विभाग के आचार्यों एवं विद्यार्थियों ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा सदैव समस्त प्राणियों के कल्याण की प्रेरणा देती रही है। इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में नैतिक मूल्यों एवं पर्यावरणीय चेतना को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होंगे।

कार्यक्रम में विभाग के अनेक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा भविष्य में भी ऐसे सेवा-प्रधान एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया।

अंत में डॉ. रविशंकर पाण्डेय ने समस्त विद्यार्थियों, सहयोगियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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