“शास्त्री कक्षा में प्रवेश लेकर विद्यार्थी अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें”—छात्र कल्याण संकाय प्रमुख:- प्रो. शैलेश कुमार मिश्र

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में शास्त्री कक्षा हेतु प्रवेश प्रक्रिया 15 जून से प्रारम्भ

 

वाराणसी। विश्व की प्राचीनतम संस्कृत शिक्षण परम्पराओं के संवाहक एवं भारतीय ज्ञान-विज्ञान के प्रतिष्ठित केन्द्र सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में शास्त्री (स्नातक) कक्षा में प्रवेश प्रक्रिया 15 जून 2026 से 15 जुलाई 2026 तक प्रारम्भ की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संस्कृत, भारतीय दर्शन एवं प्राच्य विद्याओं के अध्ययन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों से निर्धारित अवधि में प्रवेश हेतु आवेदन करने का आह्वान किया है।

छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने कहा कि “शास्त्री कक्षा में प्रवेश लेकर विद्यार्थी अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान-परम्परा, सांस्कृतिक चेतना और जीवन-दर्शन की आधारशिला है। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को परम्परा और आधुनिकता के समन्वित स्वरूप में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है।”

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में वेद, व्याकरण, ज्योतिष, साहित्य, पुराण, धर्मशास्त्र, न्याय, वेदान्त, पालि एवं थेरवाद सहित विभिन्न पारम्परिक विषयों में स्नातक स्तर की शिक्षा उपलब्ध है। यहाँ अध्ययनरत विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल स्रोतों से जुड़ने तथा आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने व्यक्तित्व का विकास करने का अवसर प्राप्त होता है।

प्रो. मिश्र ने कहा कि लगभग 236 वर्षों की गौरवशाली शैक्षिक परम्परा से समृद्ध यह विश्वविद्यालय काशी की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। विश्वविद्यालय में प्रत्येक विद्यार्थी के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था, विद्वान आचार्यों द्वारा अध्यापन, पारम्परिक एवं आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का समन्वय तथा रोजगारपरक एवं मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रमों की विशेष सुविधा उपलब्ध है।

*विशेषताएँ*–

उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए विश्वविद्यालय में आधुनिक कम्प्यूटर लैब, भाषा प्रयोगशाला, वेधशाला, यंत्रशाला, पुरातत्त्व संग्रहालय, दुर्लभ पाण्डुलिपियों से समृद्ध ग्रन्थालय, यज्ञशाला, विशाल पुस्तकालय, छात्रावास, वाई-फाई युक्त परिसर, शुद्ध पेयजल एवं खेलकूद की उत्कृष्ट सुविधाएँ उपलब्ध हैं। विदेशी विद्यार्थियों एवं छात्राओं के लिए पृथक छात्रावास की व्यवस्था भी विश्वविद्यालय की विशेषताओं में सम्मिलित है।

रोजगारपरक शिक्षा

प्रो. मिश्र ने अभिभावकों एवं विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और प्राच्य विद्याओं के संरक्षण-संवर्धन में सहभागी बनने के लिए अधिकाधिक संख्या में विद्यार्थी विश्वविद्यालय से जुड़ें तथा अपने जीवन को ज्ञान, संस्कार और रोजगारपरक शिक्षा से समृद्ध करें।

प्रवेश से सम्बन्धित विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट ssvv.ac.in पर उपलब्ध है।

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