सुबह कलश यात्रा,दोपहर सात जोड़े ने आहुति संग किया हवन। रात महाआरती व भंडारे का आयोजन

 

ध्वजा रोहण व सजावट से दमका मंदिर परिसर

 

वाराणसी। काशी की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत में शुक्रवार 1 मई 2026 को वैशाख पूर्णिमा पर एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। पांडेयपुर स्थित सिंधी कॉलोनी में वह झूलेलाल मंदिर, जिसकी नींव देश की आजादी के समय रखी गई थी, अब जीर्णोद्धार के बाद नए और भव्य स्वरूप में फिर से स्थापित हो गया है।

 

गौरतलब है कि देश के विभाजन के दौर में अपने अस्तित्व और आस्था को बचाए रखने की जिद के साथ सिंधी समाज ने इस मंदिर की स्थापना की थी। करीब एक वर्ष तक चले पुनर्निर्माण कार्य के बाद अब यह मंदिर दो मंजिला भव्य स्वरूप ले चुका है। पहले यहां केवल शिवलिंग और मां दुर्गा का विग्रह था, लेकिन अब इसे बहुदेवालय स्वरूप देकर आस्था का व्यापक केंद्र बनाया गया है। दूसरी मंजिल पर बने गर्भगृह में सिंधी समाज के आराध्यदेव साईं झूलेलाल के साथ भगवान शिव, श्रीराम दरबार और राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं एक साथ विराजमान होंगी। मंदिर परिसर के ऊपर एक बड़े हॉल का निर्माण भी प्रस्तावित है, जहां भविष्य में सामाजिक और सेवा कार्य संचालित होंगे।

 

*सजावट और ध्वजा रोहण से भक्तिमय हुआ परिसर:* प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी विद्युत झालरों, फूल-मालाओं और तोरण द्वारों से भव्य रूप से सजाया गया। शुक्रवार सुबह शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर शिखर पर धर्म ध्वजा का विधिवत झंडा रोहण किया गया। ध्वजा फहरते ही पूरा क्षेत्र “जय झूलेलाल” के जयकारों से गूंज उठा।

 

*51 महिलाओं की कलश यात्रा से हुआ शुभारंभ:* वैशाख पूर्णिमा पर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत प्रातः 7 बजे सिंधी कॉलोनी की 51 महिलाओं की भव्य कलश यात्रा से हुई। पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर मंगल कलश धारण कर महिलाएं कॉलोनी से निकलकर शहर के विभिन्न मंदिरों में दर्शन करती हुई काली जी मंदिर, पांडेयपुर होते हुए पुनः मंदिर परिसर लौटीं। इसी कलश के पवित्र जल से मूर्तियों का अभिषेक कर प्राण-प्रतिष्ठा की प्रक्रिया शुरू की गई।

 

*दोपहर स्टेशन पर संत का हुआ भव्य स्वागत:* दोपहर में शिव शांति संत आसूदराम आश्रम लखनऊ के पीठाधीश्वर, सखी की जुगल-जोड़ी सरकार बाबा साईं मोहनलाल साहिब का लखनऊ से वाराणसी आगमन हुआ। वाराणसी कैंट स्टेशन पर पूज्य सिंधी पंचायत पांडेयपुर के पदाधिकारियों और सैकड़ों काशीवासियों ने फूल-मालाओं से माल्यार्पण कर उनका भव्य स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों और “साईं झूलेलाल” के जयघोष के साथ संत को मंदिर परिसर तक शोभायात्रा के रूप में लाया गया।

 

*दिनभर गूंजे वैदिक मंत्र:* इस अवसर पर दिनभर मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जलाधिवास, अन्नाधिवास, नेत्रोन्मीलन, स्नान अनुष्ठान, शिखर पूजन, मुख्य प्राण-प्रतिष्ठा का क्रम चला। दोपहर में 7 यजमान जोड़ों ने पूरे विधि-विधान से हवन-पूजन व आरती की। दोपहर 3 बजे रुद्राभिषेक और 4 बजे हवन-पूजन के बाद भक्तों का दर्शन के लिए तांता लग गया।

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