
वाराणसी। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे सोमवार को घोषित होने के बाद देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। खासकर पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ऐतिहासिक और अप्रत्याशित जीत ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। इसी क्रम में लखनऊ से वाराणसी पहुंचते ही प्रदेश सरकार के स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जोरदार जश्न मनाया।
सिगरा स्थित मंत्री के कार्यालय में कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटी। जैसे ही पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम स्पष्ट हुए, कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। कार्यालय परिसर में ढोल-नगाड़ों की गूंज, पटाखों की आवाज और “भारत माता की जय” तथा “जय श्रीराम” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।
इस मौके पर मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने कार्यकर्ताओं के साथ पारंपरिक बंगाली व्यंजन झालमुड़ी और रसगुल्ले बांटकर खुशी का इजहार किया। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई दी और इसे “ऐतिहासिक परिवर्तन” बताया।
मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “पश्चिम बंगाल में वर्षों से चला आ रहा तुष्टिकरण और मुस्लिम एजेंडा पूरी तरह फेल हो गया है। जनता ने विकास और सुशासन के नाम पर भाजपा को अपना समर्थन दिया है।” उन्होंने आगे कहा कि राज्य में लंबे समय से भय और अराजकता का माहौल था, जिससे जनता अब मुक्ति चाहती थी। जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव का रास्ता चुना है। मंत्री जायसवाल ने भाजपा की जीत को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि “आज गंगोत्री से गंगासागर तक कमल खिल चुका है। यह सिर्फ एक राज्य की जीत नहीं, बल्कि पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और जनता के विश्वास की जीत है।” उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नेतृत्व और संगठन की मजबूती का परिणाम बताया। मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जनता अब “झूठे वादों और तुष्टिकरण की राजनीति” से ऊब चुकी है। उन्होंने कहा कि “अब राजनीति विकास, पारदर्शिता और राष्ट्रहित के मुद्दों पर होगी। जो दल इन मूल्यों को नहीं अपनाएंगे, उन्हें जनता नकार देगी।”
कार्यक्रम में मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस जीत को “ऐतिहासिक” करार दिया। कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि पश्चिम बंगाल में यह जीत आसान नहीं थी, क्योंकि वहां लंबे समय से एक ही पार्टी का दबदबा रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह परिणाम साबित करता है कि जनता अब बदलाव चाहती है और विकास को प्राथमिकता दे रही है। युवा कार्यकर्ताओं ने इसे “नए भारत की शुरुआत” बताया। गौरतलब हो कि वाराणसी, जो प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र भी है, यहां इस तरह का जश्न मनाना राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस अवसर पर राकेश सिंह अलगू, कमलेश झा, दिनेश कालरा, अजित सिंह, दिलीप चौहान आदि सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
