
विश्वकर्मा समाज ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग उठाई
वाराणसी। चौकाघाट स्थित श्री विश्वकर्मा सभा, वाराणसी की महत्वपूर्ण बैठक रविवार को सम्पन्न हुई। बैठक में समाज के पदाधिकारियों एवं गणमान्य सदस्यों ने भाग लिया। सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जो भी राजनीतिक दल विश्वकर्मा समाज के सम्मान, अधिकार और राजनीतिक भागीदारी की बात करेगा, समाज उसी का समर्थन करेगा। सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सोमनाथ विश्वकर्मा ने कहा कि प्रदेश में विश्वकर्मा समाज की जनसंख्या 5 प्रतिशत से अधिक है और पूर्वांचल की लगभग 25 से 30 विधानसभा सीटों पर समाज का निर्णायक प्रभाव होने के बावजूद राजनीतिक दलों द्वारा अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि समाज राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास में अग्रणी रहा है, लेकिन राजनीतिक स्तर पर लगातार उपेक्षा झेलता रहा है। श्री विश्वकर्मा सभा के अध्यक्ष अमरनाथ विश्वकर्मा ने कहा कि विश्वकर्मा समाज केवल एक जाति नहीं, बल्कि सृजन, निर्माण और विकास का प्रतीक है। समाज ने मंदिरों, भवनों, किलों, औजारों और कलाओं के माध्यम से देश की सांस्कृतिक एवं आर्थिक समृद्धि में अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो दल समाज के सम्मान और हितों की बात करेगा, वही प्रदेश की सत्ता तक पहुंचेगा।
विश्वकर्मा सभा मंत्री अनिल शर्मा और कोषाध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि पूरे प्रदेश में समाज का कोई सांसद, विधायक या पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं है। दशकों से चली आ रही उपेक्षा अब स्वीकार नहीं की जाएगी और समाज लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेगा। बैठक में अरविंद विश्वकर्मा, डॉ. सुनील विश्वकर्मा, एडवोकेट शिव शंकर शर्मा, जुगल किशोर, चंद्रकला विश्वकर्मा, रीना विश्वकर्मा, अनिल विश्वकर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, कृष्ण कुमार विश्वकर्मा, जयराम विश्वकर्मा, संतोष विश्वकर्मा, दिलीप विश्वकर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।












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