प्रेमचंद की ‘चोरी’ कहानी ने दिया मानवीय संवेदनाओं का संदेश

वाराणसी। लमही स्थित प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट द्वारा आयोजित साप्ताहिक साहित्यिक श्रृंखला “सुनो मैं प्रेमचंद” का 1931वां दिवस साहित्यिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘चोरी’ का पाठन नंदलाल राजभर ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रो. श्रद्धानंद जी ने कहा कि ‘चोरी’ केवल अपराध की कहानी नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, विश्वास और आत्मसम्मान का सशक्त दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि बिना आधार के किया गया संदेह किसी निर्दोष व्यक्ति को गहरी पीड़ा पहुंचा सकता है। कहानी सामाजिक पूर्वाग्रहों और कमजोर वर्गों के प्रति भेदभाव पर भी करारा प्रहार करती है। श्रीप्रकाश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज की वास्तविकताओं को उजागर किया है। वहीं ट्रस्ट के निदेशक राजीव गोंड ने बताया कि “सुनो मैं प्रेमचंद” श्रृंखला के अंतर्गत आगे भी उनकी अन्य कहानियों पर संवाद जारी रहेगा। कार्यक्रम में रामनरेश पाल ने एकल काव्यपाठ प्रस्तुत किया। संचालन आयुषी दूबे ने किया, स्वागत मनोज विश्वकर्मा तथा धन्यवाद ज्ञापन रोहित गुप्ता ने किया। इस अवसर पर साहित्यप्रेमी, शोधार्थी, छात्र एवं स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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