छ: दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ रामगढ़ परिसर में

झारखंड/वाराणसी।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी तथा रामगढ़ कॉलेज, रामगढ़, झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में छः दिवसीय “समतामूलक उच्च शिक्षा : भारतीय ज्ञान परंपरा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण” विषयक संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) का शुभारंभ रामगढ़ परिसर में हुआ।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) तथा उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका से अवगत कराना है।

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रत्ना पांडेय ने अतिथियों का स्वागत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीकी नवाचारों के समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम में विनोबा भावे विश्वविद्यालय के सीसीडीसी डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति भी रही। उन्होंने शिक्षकों की क्षमता-वृद्धि को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

प्रथम शैक्षणिक सत्र “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में भारतीय ज्ञान प्रणाली का पुनर्स्मरण” विषय पर आयोजित हुआ, जिसमें प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध) ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता एवं उसके शैक्षिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में डॉ सुनील कुमार त्रिपाठी सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने “भारतीय ज्ञान प्रणाली के मूलभूत सिद्धांत” विषय पर व्याख्यान देते हुए पाठ्यचर्या एवं शिक्षण में इसके व्यावहारिक उपयोगों की चर्चा की।

तृतीय सत्र “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मूलभूत सिद्धांत” विषय पर डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आधारभूत अवधारणाओं, उसके विभिन्न अनुप्रयोगों तथा शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में उसकी संभावनाओं से परिचित कराया।

इस पहल के अंतर्गत झारखंड के हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा तथा चतरा जिलों में समानांतर रूप से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में 200 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम के निदेशक प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई हैं, जबकि इसका समन्वयन डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, एवं डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई द्वारा किया जा रहा है।

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