
वाराणसी, 10 जून। काशी के सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार एवं साहित्यकार सिद्धनाथ शर्मा ‘सिद्ध जी’ के निधन से साहित्य एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर व्याप्त है। उनके निधन पर वरिष्ठ समाजसेवी, साहित्यकार तथा नादान परिंदे साहित्य मंच के संस्थापक डॉ. सुबाष चंद्र ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसे साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति बताया है।
डॉ. सुबाष चंद्र ने अपने शोक संदेश में कहा कि सिद्धनाथ शर्मा ‘सिद्ध जी’ ने अपनी उत्कृष्ट ग़ज़लों, कविताओं और साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी रचनाओं में समाज की पीड़ा, मानवीय संवेदनाएं, प्रेम, करुणा और जीवन के विविध आयामों का सजीव चित्रण देखने को मिलता था। वे साहित्य साधना के प्रति पूर्णतः समर्पित थे तथा नई पीढ़ी के रचनाकारों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहे।
उन्होंने कहा कि सिद्ध जी का व्यक्तित्व अत्यंत सरल, सौम्य और मिलनसार था। साहित्य के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण उन्हें अन्य साहित्यकारों से अलग पहचान दिलाता था। काशी की साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
डॉ. सुबाष चंद्र ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस दुःख की घड़ी में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि सिद्धनाथ शर्मा ‘सिद्ध जी’ भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनकी रचनाएं और साहित्यिक योगदान सदैव साहित्य प्रेमियों के हृदय में जीवित रहेंगे।
नादान परिंदे साहित्य मंच सहित अनेक साहित्यकारों, कवियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। ॐ शांति।


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