
वाराणसी। देश की आजादी के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हरिफल सिंह की 41वीं पुण्यतिथि मंगलवार को श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर उनके पौत्र, समाजसेवी एवं व्यापारी नेता अखिलेश सिंह ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तथा नगर विकास मंत्री से नदेसर तालाब पार्क में स्वतंत्रता सेनानी हरिफल सिंह की प्रतिमा स्थापित किए जाने की मांग की है। अखिलेश सिंह ने बताया कि वर्ष 1918 में नदेसर में जन्मे हरिफल सिंह ने मात्र 16 वर्ष की आयु में स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी शुरू कर दी थी। देश की आजादी के संघर्ष में उन्होंने अनेक यातनाएं सहीं। वर्ष 1930 एवं 1932 में उन्हें छह-छह माह का कारावास भुगतना पड़ा। वहीं, 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण वर्ष 1942 से 1945 तक लगभग 25 माह तक नजरबंद रखा गया।
उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी हरिफल सिंह ने समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने काशी विद्यापीठ में प्रथम पुस्तकालयाध्यक्ष के रूप में 35 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। इसके साथ ही वे ‘राष्ट्र सेवक’ एवं ‘अमर हलचल’ समाचार पत्रों के संपादक भी रहे। हरिफल सिंह ने अपने सिद्धांतों और स्वाभिमान को सर्वोपरि रखते हुए स्वतंत्रता सेनानी पेंशन तथा संसद सदस्य बनने के प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया था। उनके त्याग, समर्पण और राष्ट्रभक्ति के कारण वे जनमानस में आज भी आदर के साथ याद किए जाते हैं।
16 जून 1985 को उनके निधन के बाद प्रशासन द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान कर अंतिम विदाई दी गई थी। उनकी 41वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनके प्रपौत्र डॉ. अविनाश सिंह द्वारा नदेसर स्थित साईं मंदिर परिसर में मंगलवार को सायं 4 बजे से शरबत एवं निःशुल्क दवा वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


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