
वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में आगामी 30 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाले 44वें दीक्षांत समारोह की तैयारियाँ अंतिम चरण में पहुँच गई हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में विभिन्न समितियों की व्यापक समीक्षा बैठक आज अपराह्न 4 बजे कुलपति कार्यालय में सम्पन्न हुई, जिसमें समारोह की प्रत्येक व्यवस्था का सूक्ष्म परीक्षण करते हुए सभी समितियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
उक्त बैठक में यह निर्णय लिया गया कि दीक्षान्त समारोह शताब्दी भवन में आयोजित किया जाएगा, वहां होने वाले समारोह की समस्त व्यवस्थाओं, अतिथियों के स्वागत, शॉल एवं स्मृति-चिह्न, स्वर्ण पदक समिति, उपाधि एवं परिधान समिति, उपाधि-पत्र वितरण, डिग्री एवं अंकपत्रों की सुरक्षित व्यवस्था, मुद्रण एवं संशोधन, वीडियो एवं फोटोग्राफी, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, उपवेशन व्यवस्था, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, परिसर की कटाई-छंटाई तथा अन्य सभी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय का 44वाँ दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण का अवसर नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृत की गौरवशाली विरासत और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता का राष्ट्रीय मंच होगा। उन्होंने सभी समितियों से उत्तरदायित्व, अनुशासन, समन्वय एवं समयबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
बैठक में दीक्षांत समारोह की श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित चित्रकला, निबंध, पुस्तक पठन, पारंपरिक खेल तथा अन्य प्रतियोगिताओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। निर्णय लिया गया कि मुख्य समारोह में देशभक्ति गीतों एवं पूर्वांचल के पारंपरिक लोकनृत्य की मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीक्षांत समारोह का विशेष आकर्षण होंगी।
यह भी निर्णय लिया गया कि दीक्षांत समारोह से पूर्व विश्वविद्यालय परिसर में व्यापक स्वच्छता, सौंदर्यीकरण एवं हरित परिसर अभियान संचालित किया जाएगा, ताकि विश्वविद्यालय का सम्पूर्ण वातावरण गरिमामय एवं आकर्षक स्वरूप में दिखाई दे। साथ ही समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं उनके महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों को मंच पर आमंत्रित कर विशेष सम्मान प्रदान किया जाएगा। बैठक में सुरक्षा, प्रोटोकॉल, यातायात, अतिथि सत्कार तथा सभी व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया गया।
बैठक में कुलसचिव राकेश कुमार, परीक्षा नियंत्रक डॉ. दिनेश कुमार, प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल, प्रो. हीरक कांत चक्रवर्ती, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. शैलेश कुमार मिश्र,प्रो राजनाथ, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. राघवेन्द्र, प्रो. शंभूनाथ, प्रो. महेन्द्र पाण्डेय, प्रो. विद्या कुमारी चन्द्रा, प्रो. अमित कुमार शुक्ल, डॉ विशाखा शुक्ला सहित विभिन्न समितियों के अध्यक्ष, संयोजक एवं सदस्य उपस्थित रहे।










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