
वाराणसी। मोक्ष नगरी काशी में सुमेरु पीठ, डुमराव बाग कॉलोनी,अस्सी में अखाड़े के 99 वर्षीय वरिष्ठ तपस्वी अखंडानंद तीर्थ के देहत्याग के उपरांत षोडशी कार्यक्रम, श्रद्धांजलि सभा, साधु संगोष्ठी एवं दंडी स्वामियों के भंडारे का आयोजन किया । कार्यक्रम जगद्गुरु शंकराचार्य काशी सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत-महात्माओं, दंडी स्वामियों, साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर तपस्वी अखंडानंद तीर्थ को श्रद्धांजलि अर्पित की। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि, अखंडानंद तीर्थ का संपूर्ण जीवन तप, साधना, त्याग और सनातन धर्म के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण रहा।
उन्होंने अपना पूरा जीवन आध्यात्मिक साधना एवं धर्मसेवा में समर्पित किया। उनका देहावसान संत समाज और सनातन परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि संतों का शरीर नश्वर है, लेकिन उनके तप, ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक विचार सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में संतों का जीवन समाज को धर्म, सत्य, संयम और सेवा का संदेश देता है। अखंडानंद तीर्थ ने अपने जीवन में साधना और तपस्या के माध्यम से संत परंपरा को समृद्ध किया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
कार्यक्रम के दौरान साधु संगोष्ठी में संत-महात्माओं ने अखंडानंद तीर्थ के जीवन, तपस्या एवं धार्मिक योगदान पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने कठिन साधना के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का कार्य किया। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित संतों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इस अवसर पर दंडी स्वामियों एवं संत-महात्माओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया। काशी सुमेरु पीठ में आयोजित कार्यक्रम में संत समाज के अनेक प्रमुख प्रतिनिधि, श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन संतों के आशीर्वचन एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ, कार्यक्रम का संचालन स्वामी बृजभूषणानंद महाराज ने किया। विचार व्यक्त करने वालों महंत प्रकाश देव आश्रम बिजोलिया वीर आश्रम, स्वामी मधुसूदन आश्रम, नर्मदा आश्रम,श्रवण देव आश्रम पुष्कर मठ, मेजर ओंकार नाथ दुबे,जय भवन दीक्षित,नरेशानंद,अनंत विज्ञान मठ आदि उपस्थित रहे,अवधेश दीक्षित ने संतों का माल्यार्पण कर आशीर्वाद दिया,रमाकांत दीक्षित कार्यक्रम संयोजक रहे।










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