
वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा को पुनः तीन वर्षों के लिए कुलपति पद का दायित्व प्रदान किए जाने पर विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष, उल्लास और आत्मीयता का वातावरण है। कुलपति के रूप में उनके पुनर्नियुक्ति के अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने माल्यार्पण कर उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विश्वविद्यालय से जुड़े आत्मीयजनों ने उनके प्रति अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय विकास और उपलब्धियों की नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा।
माननीय कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा 17 अगस्त 2026 को प्रो. बिहारी लाल शर्मा को पुनः तीन वर्षों के लिए कुलपति पद पर नियुक्त किए जाने संबंधी पत्र प्रेषित किया गया। कुलपति प्रो. शर्मा ने अपने प्रथम कार्यकाल में 22 अगस्त 2023 को कुलपति पद का कार्यभार ग्रहण किया था और अब 22 अगस्त 2026 को अपने दूसरे तीन वर्षीय कार्यकाल का कार्यभार ग्रहण करेंगे।
प्रो. बिहारी लाल शर्मा के प्रथम कार्यकाल को विश्वविद्यालय के विकास, शैक्षणिक उन्नयन और संस्कृत की प्रतिष्ठा को नई दिशा देने वाले कार्यकाल के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय की मूल आत्मा -संस्कृत, भारतीय ज्ञान परम्परा और शास्त्रीय शिक्षा- को केन्द्र में रखते हुए आधुनिक आवश्यकताओं के साथ उसके समन्वय पर निरन्तर बल दिया। संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ संस्कृत महाविद्यालयों के शैक्षणिक एवं संस्थागत विकास के लिए भी उन्होंने निरन्तर प्रयास किए।
उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार, आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, विभिन्न संस्थाओं के साथ अकादमिक सहयोग तथा विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों के सृजन की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल हुईं। विश्वविद्यालय के विकास के साथ संस्कृत शिक्षा से जुड़े महाविद्यालयों को भी मुख्यधारा में और अधिक सशक्त बनाने की उनकी प्रतिबद्धता निरन्तर दिखाई दी है।
कुलपति प्रो. शर्मा के पुनर्नियुक्त होने की सूचना के बाद विश्वविद्यालय परिवार के साथ-साथ संस्कृत महाविद्यालयों, शिक्षाविदों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से भी स्वागत और अभिनंदन का सिलसिला लगातार जारी है। यह आत्मीय सम्मान केवल एक व्यक्ति के पुनर्नियुक्त होने का उत्सव नहीं, बल्कि उनके प्रति विश्वविद्यालय परिवार और संस्कृत जगत के विश्वास एवं अपेक्षाओं की अभिव्यक्ति है।
विश्वविद्यालय परिवार का मानना है कि प्रो. शर्मा का अनुभव, दूरदृष्टि, कार्य के प्रति समर्पण और संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाले तीन वर्षों में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय को नई पहचान और नई ऊँचाई प्रदान करेगी। उनके पुनः कार्यभार ग्रहण के साथ विश्वविद्यालय परिवार एक नए उत्साह, नई ऊर्जा और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने को तैयार है।
यह पुनर्नियुक्ति विश्वास की निरन्तरता है और आने वाला कार्यकाल संस्कृत, शिक्षा, शोध तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के वैश्विक विस्तार की नई यात्रा का शुभारम्भ।

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