
वाराणसी।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी द्वारा “भारतीय ज्ञान परम्परा”* विषय पर छः दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी तथा प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान), आईयूसीटीई, वाराणसी के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है।
पाँचवें दिवस के प्रथम सत्र में प्रतिभागियों ने प्रेजेंटेशन तथा चर्चा किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रो. रामकांत पांडेय, कुलपति, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार ने “कला, संगीत, वास्तुकला एवं सौन्दर्यशास्त्र (नाट्यशास्त्र, संगीत रत्नाकर, विष्णुधर्मोत्तर आदि)” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा में कला एवं सौन्दर्यशास्त्र की समृद्ध परम्परा तथा उसके दार्शनिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्राचीन भारतीय ग्रंथों में कला, संगीत और वास्तुकला के सिद्धांतों का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित विवेचन मिलता है।
कार्यक्रम के तृतीय सत्र में प्रो. आनंद मिश्रा, हाइडेलबर्ग विश्वविद्यालय, जर्मनी ने “ए.आई., डिजिटल ह्यूमैनिटीज़ एंड प्रिज़र्वेशन ऑफ़ इंडियन नॉलेज ” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए । उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल ह्यूमैनिटीज़ भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में नई संभावनाएँ खोल रही हैं। प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों को डिजिटल माध्यम से सुरक्षित कर भविष्य की पीढ़ियों तक पहुँचाया जा रहा है। एआई आधारित तकनीकें भाषा अनुवाद, पाठ विश्लेषण और सांस्कृतिक धरोहरों के दस्तावेज़ीकरण में सहायक बन रही हैं। डिजिटल ह्यूमैनिटीज़ के माध्यम से भारतीय ज्ञान प्रणाली को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।
चतुर्थ सत्र में वक्ता प्रो. सी. बी. शर्मा, कुलपति, वी.बी.यू., हज़ारीबाग ने “टीचर एजुकेशन एंड इंस्टीट्यूशनल लीडरशिप थ्रू आई.के.एस.” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए । उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) के माध्यम से शिक्षक शिक्षा और संस्थागत नेतृत्व को नई दिशा दी जा रही है। यह पहल शिक्षा जगत में परंपरा और आधुनिकता का संतुलन स्थापित करने का प्रयास है। संस्थागत नेतृत्व को सशक्त बनाने के लिए आईकेएस आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। शिक्षक शिक्षा में भारतीय मूल्यों और नवाचारों का समावेश किया जा रहा है। इससे शिक्षा प्रणाली अधिक समावेशी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनने की ओर अग्रसर है।
इस छः दिवसीय कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी तथा डॉ. राजा पाठक, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई द्वारा किया जा रहा है।

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