
वाराणसी। अस्सी चौराहे स्थित प्रसिद्घ” पप्पू की चाय की अड़ी” पर शिक्षक दिवस के अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार, समाजसेवी एवं नादान परिंदे साहित्य मंच के संस्थापक / अध्यक्ष डॉ. सुबाष चंद्र द्वारा शिक्षकों के सम्मान में विशेष समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. सुबाष चंद्र ने शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रो. देवब्रत चौबे एवं उदय नारायण पाण्डेय को अंगवस्त्रम एवं स्मृतिचिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। सम्मान समारोह में उपस्थित लोगों ने दोनों शिक्षकों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की।
डॉ. सुबाष चंद्र ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, अपितु विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का प्रमुख आधार होता है। शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार और अनुभव के माध्यम से नई पीढ़ी को सही दिशा प्रदान करता है। यही विद्यार्थी आगे चलकर समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए शिक्षकों का सम्मान वास्तव में ज्ञान, संस्कार और शिक्षा की उस परंपरा का सम्मान है, जिसने भारतीय समाज, संस्कृति, एवं सभ्यता को सदियों से सही दिशा एवं मार्गदर्शन देने का काम किया
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है। गुरु अपने शिष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने का कार्य करता है। वर्तमान समय में शिक्षा के बदलते स्वरूप के बीच भी शिक्षक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। तकनीकी सुविधाएं भले ही बढ़ गई हों, लेकिन विद्यार्थियों को मानवीय मूल्यों, अनुशासन, संस्कार और जिम्मेदारी का बोध कराने में शिक्षक की भूमिका का कोई विकल्प नहीं है।
डॉ. सुबाष चंद्र ने कहा कि साहित्य और शिक्षा एक-दूसरे के पूरक हैं। साहित्य व्यक्ति के भीतर संवेदनशीलता, चिंतन और सामाजिक सरोकारों को विकसित करता है, जबकि शिक्षा उस चिंतन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है। नादान परिंदे साहित्य मंच के माध्यम से साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ साहित्यकारों और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करने का प्रयास निरंतर किया जा रहा है।
सम्मान प्राप्त करने वाले प्रो. देवब्रत चौबे एवं उदय नारायण पाण्डेय ने डॉ. सुबाष चंद्र के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस पर मिला यह सम्मान उनके लिए विशेष प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का दायित्व विद्यार्थियों को बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है।
कार्यक्रम में अशोक पाण्डेय, समीर माथुर, पियूष मिश्रा, प्रवीन श्रीवास्तव, कमला कांत शुक्ला, सुबाष चतुर्वेदी, गुड्डू मिश्रा, आशुतोष मिश्रा, विजय अग्रहरी, राजेश आजाद, मनोज सिंह, डब्बी सहित साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक लोग उपस्थित रहे।

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