“तमसो मा ज्योतिर्गमय” के भाव से आलोकित हुआ संस्कृत विश्वविद्यालय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 76वें जन्मदिवस पर दो हजार से अधिक दीपों से जगमगाया ऐतिहासिक मुख्य भवन

सेवा-संकल्प से जनसेवा की ज्योति प्रज्वलित करना ही प्रधानमंत्री जी के जन्मदिवस की सार्थक अभिव्यक्ति- कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा।

 

वाराणसी। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में ‘सेवा-संकल्प’ के भाव को समर्पित विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला का शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम का प्रारम्भ वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। वैदिक ऋचाओं और मंगलमंत्रों की पवित्र ध्वनि से सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिसर गुंजायमान हो उठा।

ऐतिहासिक मुख्य भवन के समक्ष सायं 6:30 बजे ‘आशीर्वाद का दीप’ प्रज्ज्वलित किया गया। विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने दो हजार से अधिक दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्र के कल्याण, समृद्धि एवं मंगल की कामना की। दीपों की सामूहिक ज्योति से ऐतिहासिक मुख्य भवन एवं सम्पूर्ण परिसर प्रकाश-पुंज में परिवर्तित हो उठा और प्राचीन ज्ञान-परम्परा की इस तपोभूमि से सेवा, संस्कार, समर्पण एवं राष्ट्रहित का संदेश प्रसारित हुआ।

 

इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में दीप केवल प्रकाश का साधन नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, आशा और सतत कर्म का प्रतीक है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ एवं माँ अन्नपूर्णा से प्रधानमंत्री जी के यश, कीर्ति, दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं राष्ट्रसेवा के लिए निरन्तर ऊर्जा की मंगलकामना की गई।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के जन्मदिवस को सेवा-संकल्प के रूप में मनाना जनसेवा की ज्योति को प्रज्वलित करने की सार्थक अभिव्यक्ति है। भारतीय जीवन-दर्शन में *“परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः”* की भावना के साथ लोकमंगल को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सेवा-आधारित कार्यक्रम विद्यार्थियों एवं समाज में सेवा, स्वच्छता, कर्तव्यबोध, संस्कार और राष्ट्रहित की भावना को सुदृढ़ करने का माध्यम बनेंगे।

 

कुलसचिव राकेश कुमार ने कहा कि *“तमसो मा ज्योतिर्गमय”* का शाश्वत संदेश हमें अज्ञान से ज्ञान, निराशा से आशा और निष्क्रियता से सेवा एवं कर्म की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज वैदिक मंत्रों से गुंजायमान विश्वविद्यालय परिसर में प्रज्वलित प्रत्येक दीप सेवा, संस्कार और राष्ट्र-निर्माण के संकल्प का प्रतीक है। दीप प्रज्ज्वलन का यह आयोजन विश्वविद्यालय की भारतीय ज्ञान-परम्परा और सामाजिक उत्तरदायित्व का सुंदर समन्वय है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार से सेवा एवं सकारात्मक सामाजिक सहभागिता को निरन्तर आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि जन्मदिवस के अवसर पर दीप प्रज्ज्वलन सेवा, संकल्प और राष्ट्रसमर्पण का पावन प्रतीक है। दीपक का प्रकाश ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ का संदेश देते हुए हमें अज्ञान से ज्ञान और स्वार्थ से लोकमंगल की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। यह अवसर विश्वविद्यालय परिवार को जनसेवा एवं राष्ट्रहित के कार्यों के प्रति अपने संकल्प को और सुदृढ़ करने की प्रेरणा प्रदान करता है।

 

कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं छात्रकल्याण संकाय प्रमुख प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की 76वीं जन्म-जयंती के अवसर पर 17 अक्टूबर 2026 तक विभिन्न सेवा, जन-जागरूकता एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में सेवा, अनुशासन, स्वच्छता, सामाजिक दायित्व एवं राष्ट्रहित के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

 

कार्यक्रम में डॉ. दुर्गेश पाठक, डॉ. विजेन्द्र आर्य सहित शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। वैदिक मंत्रोच्चार की मंगलमयी गूँज और सैकड़ों दीपों की आलोकित ज्योति ने सम्पूर्ण परिसर को ज्ञान, संस्कार और सेवा के प्रकाश से अभिभूत कर दिया।

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