संगोष्ठी में अर्जित ज्ञान को शिक्षा प्रभावी ढंग से प्रयोग में लाए

वाराणसी।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी द्वारा एआई-इन्फ्यूज़्ड इमर्सिव इन्क्वायरी पेडागॉजी वर्कशॉप फॉर फिजिकल साइंस एजुकेटर्स विषय पर 14-18 सितंबर 2026 तक पाँच दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने की। समापन सत्र में स्वागत उद्बोधन तथा रिपोर्ट प्रस्तुति डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई ने किया। कुछ प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव को साझा किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राज सिंह ने किया।

 

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई ने प्रतिभागियों के साथ संवाद स्थापित करते हुए उनके भावी प्रयासों एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों ने जो ज्ञान एवं अनुभव अर्जित किए हैं, उनका वे अपनी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में प्रभावी रूप से प्रयोग करेंगे। उन्होंने संगोष्ठी से प्राप्त ज्ञान एवं अनुभवों को व्यवहार में उतारने तथा उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में सार्थक रूप से लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

 

कार्यक्रम के अंतिम दिन के प्रथम सत्र में डॉ. वी. वी. वी. सत्यनारायण, आईयूएसी, नई दिल्ली ने “डिजिटल लैब्स फॉर विकसित भारत@2047” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की दिशा में डिजिटल प्रयोगशालाओं की भूमिका, विज्ञान शिक्षा में उनके उपयोग तथा विद्यार्थियों के लिए प्रयोगात्मक एवं अनुभवात्मक अधिगम के अवसरों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रयोगशाला आधारित शिक्षण को अधिक प्रभावी, सुलभ एवं नवाचारोन्मुख बनाने पर बल दिया।

 

द्वितीय सत्र में डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक प्राध्यापक (भौतिक विज्ञान), आईयूसीटीई, ने “कैपस्टन एक्शन प्लान: सस्टेनिंग इनोवेशन एंड पीयर नेटवर्किंग” विषय पर संवादात्मक सत्र आयोजित किया। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ सक्रिय संवाद करते हुए उन्हें विभिन्न कार्य सौंपे तथा कार्यशाला के दौरान अर्जित ज्ञान एवं कौशल को व्यवहार में लागू करने के लिए कैपस्टोन कार्य-योजना तैयार करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने नवाचार को सतत बनाए रखने तथा सहकर्मी नेटवर्क के माध्यम से ज्ञान, अनुभव और श्रेष्ठ शैक्षणिक प्रथाओं के निरंतर आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया।

 

इस पाँच दिवसीय कार्यक्रम में भारतभर से 30 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई ने किया।

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