काशी में तीन जगद्गुरुओं संग शंकराचार्य जी से हुई विचार विमर्श

 

वाराणसी।वर्तमान समय में काशी में विराजे परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामीश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज का परमपूज्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री श्री 1008 स्वामी श्री योगेश्वराचार्य जी पीठाधीश्वर अतुलेश्वर धाम इंद्रप्रस्थ,जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री श्री 1008 स्वामी श्री अवधेशानंद जी महाराज पीठाधीश्वर ओम शांति धाम नई दिल्ली,जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री श्री 1008 स्वामी श्री सारंगधराचार्य पीठाधीश्वर सारंग मंदिर प्रयाग,परम श्री वैष्णव स्वामी चंद्रप्रकाशाचार्य वैष्णव आश्रम मुंबई,धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे एवं अनिरुद्ध रामानुज दास पंडित दिनेश शर्मा आदि संतों ने दर्शन,भेंट कर शंकराचार्य जी से आध्यात्मिक विषयों पर विमर्श कर उनसे मार्गदर्शन प्राप्त किया एवं संतों ने इस पावन अवसर पर पूज्य शंकराचार्य जी को अंगवस्त्रम भगवान श्री जगन्नाथ जी का महाप्रसाद तथा डॉ अंकिता द्वारा रचित सनातन शाश्वत नामक पुस्तक भेंट कर उनको सम्मानित किया।साथ ही श्रीविद्यामठ में उपस्थित सैकड़ो बटुको,विद्वानों तथा संतो को अंगवस्त्रम एवं भगवान श्री जगन्नाथ जी का महाप्रसाद प्रदान किया गया।

 

तत्पश्चात समस्त संतों ने एक स्वर से ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य जी महाराज द्वारा धर्म एवं गौरक्षार्थ किए जा रहे संघर्षों का भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी के पश्चात आपने धर्म एवं गौमाता के रक्षा हेतु विपरीत परिस्थितियों में सत्ता एवं अधर्मियों के धर्मविरुद्ध नीतियों के विरुद्ध परिणाम का परवाह किए बिना संघर्ष कर सनातनियों में जो अलख जगाई है वह वन्दनीय है।समस्त संत समाज आपके हर कदम पर आपके साथ है और आपके आह्वान करने पर हमलोग किसी भी तरह का बलिदान देने हेतु तत्पर हैं।

 

इस अवसर पर पूज्य शंकराचार्य जी ने संतों,भक्तों को अपना आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि हम पद की शोभा बढ़ाने हेतु नही बल्कि धर्म की रक्षा हेतु शंकराचार्य बने हैं।हमारे धर्म की मूल गौमाता की हत्या होती रहे,धर्म की हानि होती रहे और मैं चुप रहूं तो हमारे रहने का तात्पर्य क्या रह जाएगा?गौमाता एवं धर्म की रक्षा हेतु मैं हर संभव प्रयास करूंगा और इसके निमित्त जो भी बलिदान देना पड़े मै तैयार हूं।हमारे जीवन में देवताओं एवं गुरुओं का बहुत महत्व है लेकिन फिर भी हमारे घर में पहली रोटी गौमाता हेतु निकाला जाता है इसी से हम गौमाता के महत्व को आसानीपूर्वक समझ सकते हैं।

 

जगद्गुरू रामानुजाचार्य श्री श्री 1008 स्वामी योगेश्वराचार्य जी महाराज ने कहा यदि गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित नही किया गया तो यह निश्चित रूप से सरकार के पतन का कारण बनेगा।

 

उक्त जानकारी परमधर्माधिश शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने दी है।

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