
वाराणसी। गढ़वासी टोला स्थित अमर शहीद संतोष कपूरिया युवा सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में स्थापित माँ दुर्गा की भव्य प्रतिमा के समक्ष शनिवार की रात्रि काशी के प्रतिष्ठित वैदिक विद्वानों द्वारा चारों वेदों का पारायण किया गया।
इस अवसर पर वैदिक परंपरा, सनातन संस्कृति और संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए काशी के सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान श्री वी. चन्द्रशेखर द्राविड़ घनपाठी का भव्य सम्मान किया गया।
समिति के अध्यक्ष विनय कपूरिया एवं कोषाध्यक्ष विजय कपूरिया ने बताया कि नवरात्र के अवसर पर समिति द्वारा प्रतिवर्ष काशी के एक विशिष्ट विद्वान को सम्मानित किया जाता है।
इसी परंपरा के अंतर्गत इस वर्ष पद्मविभूषण पण्डितराज श्रीराजेश्वर शास्त्री द्राविड़ जी के पौत्र एवं काशी के अग्रणी वैदिक विद्वान तथा समाजसेवी श्री वी. चन्द्रशेखर द्राविड़ घनपाठी को सम्मान प्रदान किया गया।
श्री चन्द्रशेखर घनपाठी काशी के उस गौरवशाली वैदिक परिवार की पाँचवीं पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं, जिसने पिछले पाँच पीढ़ियों से वेदों के अध्ययन-अध्यापन एवं वैदिक परंपराओं के संरक्षण के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया है। वे अपनी समृद्ध पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वेद, संस्कृत एवं सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ लोककल्याण के कार्यों में भी निरंतर सक्रिय हैं।
श्री घनपाठी पिछले तीन दशकों से प्राचीन सनातन संस्कृति, देवभाषा संस्कृत एवं वेदों के प्रचार-प्रसार में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य कांची कामकोटि पीठ एवं श्रृंगेरी पीठ के अनेक धार्मिक एवं वैदिक अनुष्ठानों में उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया है। दोनों पीठों के शंकराचार्यों का विशेष स्नेह, अनुग्रह एवं आशीर्वाद भी उन्हें प्राप्त है।
कार्यक्रम के दौरान विद्वानों एवं गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से श्री गोविंद जी शास्त्री, श्री गोपाल जी, वैदिक श्री श्याम बादल जी, बसंत लाल बादल, वैदिक शिरोमणि त्रिलोक नाथ जेटली, संरक्षक विजय कपूरिया, कन्हैया कपूरिया, अध्यक्ष विनय कपूरिया, रामेश्वर कपूरिया, संतोष शर्मा, वीरेंद्र मोहले, धर्मेंद्र जी, रोहित जी, आयुष जी, पीयूष जी, राजेश शुक्ला जी, विट्ठल जी, रमेश सेठ, रामकृष्ण गौड़, गर्व जी एवं आरव जी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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