
वाराणसी।शारदीय नवरात्र के अन्तिम दिन मंगलवार को विजया दशमी पर्व पर श्रीविद्या साधना शिविर का गरिमामय एवं भावपूर्ण वातावरण में समापन हुआ।
इस अवसर पर परमाराध्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने ‘ललिता त्रिशती’ के मंत्रों से भगवती के 300 नाम-मंत्रों का उच्चारण करते हुए 300 साड़ियों से भगवती का विशेष ‘शाटिकार्चन’ सम्पन्न किया। प्रतिदिन की भाँति इस महापूजा को पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने स्वयं अपने कर-कमलों से पूर्ण किया।
शिविर के दौरान आचार्य वीरेश्वर दातार जी के कुशल आचार्यत्व में नित्य ‘नव चण्डी’ का भव्य अनुष्ठान आयोजित किया गया, जिसमें आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत प्रवाह देखने को मिला। आयोजन में आध्यात्मिक उत्थान मण्डल की माताओं ने पूर्ण निष्ठा एवं भक्तिभाव से नित्यार्चन का दायित्व निभाया।
कार्यक्रम में कलश पूजन ब्रह्मचारी परमात्मानंद जी द्वारा सम्पन्न कराया गया, वहीं सम्पूर्ण आयोजन का सुव्यवस्थित एवं कुशल संयोजन ब्रह्मचारी प्रभु प्रभूतानन्द जी द्वारा किया गया।
इस आध्यात्मिक शिविर में भाग लेने के लिए देश भर से बड़ी संख्या में साधक एवं श्रद्धालु उपस्थित हुए। शिविर के दौरान साधनारत रहे सभी साधक समापन अवसर पर प्रस्थान करते समय अत्यंत भावुक हो गए। पूजन के उपरांत पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने सभी उपस्थित साधकों व भक्तों को साड़ी एवं यवांकुर का प्रसाद वितरित कर अपना आशीर्वाद प्रदान किया।


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