अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र में दो दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन

वाराणसी।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में “भारतीय ज्ञान परम्परा की पुनर्प्रतिष्ठा” विषय पर आयोजित द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का रविवार को समापन हुआ।

 

द्वितीय दिवस के कार्यक्रम में तीन सत्रों का आयोजन हुआ, जिनमें शिक्षा से जुड़े विविध एवं महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

 

 

सत्र-5 का विषय “शिक्षा की प्रवृत्तियाँ/विमर्श” रहा। इस सत्र में डॉ. सौरभ मालवीय, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय ने वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए।

 

उन्होंने कहा कि आज शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि मीडिया, तकनीक एवं सामाजिक परिवर्तन के साथ उसकी प्रवृत्तियाँ भी तेजी से बदल रही हैं।

 

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा के समसामयिक विमर्श को समझे बिना किसी भी शैक्षिक नीति अथवा व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संचार माध्यमों के युग में विद्यार्थियों तक सही एवं संतुलित जानकारी पहुँचाना शिक्षकों की एक नई जिम्मेदारी बन गई है।

 

सत्र की अध्यक्षता श्री दिव्य कांत शुक्ल, पूर्व सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज ने की तथा संचालन प्रो. मिलन रानी जमातिया द्वारा किया गया।

 

सत्र-6 का विषय “शोध, प्रशिक्षण तथा गुणवत्ता विकास हेतु विभिन्न हितधारकों में समन्वय, योजना-निर्माण एवं क्रियान्वयन” रहा। इस सत्र में डॉ. रवीन्द्र कान्हेरे, अध्यक्ष, निजी विश्वविद्यालय शुल्क नियामक अधिकरण, मध्य प्रदेश ने वक्ता के रूप में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शोध एवं प्रशिक्षण को केवल औपचारिकता न मानकर एक सतत प्रक्रिया के रूप में अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों की सहभागिता से बनी समन्वित योजना ही शिक्षा के क्षेत्र में स्थायी एवं सार्थक परिवर्तन ला सकती है। सत्र की अध्यक्षता श्री डी. रामकृष्ण राव, सदस्य, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद, नई दिल्ली ने की तथा संचालन प्रो. देव नंदन सिंह द्वारा किया गया।

 

इसी क्रम में सामूहिक चर्चा का भी आयोजन हुआ, जिसमें प्रांत एवं क्षेत्रवार प्रतिभागियों ने अपने- अपने क्षेत्र एवं प्रांत स्तर पर किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी साझा की I

 

सत्र-7 का विषय “वर्तमान परिदृश्य एवं युवा पीढ़ी में कर्तव्य-बोध जागरण” रहा। इस सत्र में श्री गोविन्द चन्द्र महंत, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान ने वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में युवा पीढ़ी के समक्ष अनेक चुनौतियाँ हैं, किंतु उनमें कर्तव्य-बोध जगाना सबसे अधिक आवश्यक है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि केवल अधिकारों की बात करने वाली पीढ़ी नहीं, बल्कि कर्तव्यों को समझने वाली पीढ़ी ही राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान दे सकती है।

 

सत्र की अध्यक्षता डॉ. रवीन्द्र कान्हरे, अध्यक्ष, निजी विश्वविद्यालय शुल्क नियामक अधिकरण, मध्य प्रदेश ने की तथा संचालन प्रो. किरन लता डंगवाल द्वारा किया गया।

 

कार्यशाला के द्वितीय एवं समापन दिवस में संस्थान के समस्त अधिकारीगण, शिक्षकगण एवं कर्मचारीगण की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन राष्ट्रगीत के साथ हुआ।

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