
रिपोर्ट :- अनुपम भट्टाचार्य
वाराणसी।अश्विन माह के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि पर महर्षि वाल्मीकि जी जयंती श्री राम तरक आंध्रा आश्रम में धूम धाम से मनाया गया ।
प्रातःकाल महर्षि वाल्मीकि जी का पाठ किया गया। जिसका नेतृत्व सोम्यालुजुलु महाराज जी के निर्देशन में सुबह पाठ किया गया। पाठ के पश्चात समस्त भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया ।
उक्त अवसर पर आंध्रा आश्रम के मैनेजिंग ट्रस्टी वी वी सुंदर शास्त्री जी ने कहा कि प्रति वर्ष आश्विन माह के पूर्णिमा को महर्षि बाल्मीकि जयंती मनाया जाता है। बाल्मीकि जी 24,000 श्लोकों वाले महाकाव्य रामायण की रचना किये थे। हिंदू धर्म के महान ऋषि और संस्कृत भाषा के आदि कवि के रूप में पूजे जाते हैं। अपने परिवार के भरण पोषण के लिए जंगल में आने जाने वाले लोगों को लूटना शुरू किए।
कालांतर में देवर्षि नारद मुनि जी से संपर्क होने पर उनको ज्ञान प्राप्त हुआ , उनको एहसास हुआ यह कार्य गलत है। उन्होंने घोर तपस्या शुरू किए। अपने ज्ञान प्राप्त होने पर रामायण रचना किये। माता सीता के परित्याग के बाद अपने आश्रम में आश्रय दिये। सीता जी के जुड़वां पुत्र लव कुश का जन्म एवं शिक्षा दीक्षा उन्हीं के आश्रम में हुआ।
उक्त कार्यक्रम में मार्कण्डेय शास्त्री, पप्पू कृष्ण प्रसाद,रुक्मिणी अम्मा, पप्पू नरसिम्हा मूर्ति, कृष्ण प्रसाद , रवि शंकर,वीरभद्र राव, अरुण सहित अनेको जनों ने पाठ किये।

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