
वाराणसी। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर वेद पारायण केन्द्रम न्यास की ओर से आयोजित दो दिवसीय शरदकालीन महापूजा के दूसरे दिन रविवार को श्री यंत्र की स्थापना के साथ मां महालक्ष्मी की विशेष आराधना की गई।
अनुष्ठान की शुरुआत वैदिक विधि-विधान से पूजन के साथ हुई। इसके बाद श्री मंत्र जप, सहस्रार्चन और हवन संपन्न कराया गया।
आचार्य अशोक द्विवेदी के आचार्यत्व में 21 वैदिक विद्वानों ने धार्मिक अनुष्ठान कराए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन कुंड में आहुतियां अर्पित करते श्रद्धालुओं ने मां महालक्ष्मी के प्रति अपनी आस्था निवेदित की। आयोजन में शामिल होने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु और शिष्य काशी पहुंचे।
न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष हर्ष राज द्विवेदी के संयोजन में हुए आयोजन में आइएएस सुरेश चंद्रा सपत्नीक शामिल हुए।
न्यास के सदस्य एवं आयकर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ओम प्रकाश शुक्ला, दिग्विजय सिंह और अशोक त्रिपाठी सहित अन्य श्रद्धालुओं ने भी हवन में आहुतियां दीं।
न्यास के 44वें वार्षिक समारोह के अंतर्गत आयोजित विद्वत सभा में काशी के विद्वान हरिनारायण त्रिपाठी और पंडित राजेंद्र प्रसाद द्विवेदी ने शरद पूर्णिमा के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
भजनों के सुरों और नृत्य की भाव-भंगिमाओं में झलकी भक्ति
महापूजा के साथ आयोजित सांस्कृतिक संध्या में सुर, ताल और भाव के माध्यम से आराधना की अभिव्यक्ति हुई। आर्या देशपांडे ने गणपति वंदना से भरतनाट्यम की शुरुआत की और शिव पंचाक्षर स्तोत्र की प्रस्तुति के साथ समापन किया। शास्त्रीय गायिका मधुमिता भट्टाचार्य और गायक रतन त्रिपाठी के भजनों ने वातावरण को भक्तिरस से सराबोर किया। कथक नृत्यांगना विशालाक्षी त्रिपाठी और ब्राह्मी त्रिपाठी ने मंगलमूर्ति..की प्रस्तुतियों से भावविभोर किया।
हर्ष राज द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया। समारोह में काशी के विद्वान, श्रद्धालु और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वैदिक अनुष्ठान, विद्वत विमर्श और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ दो दिवसीय महापूजा संपन्न हुई।

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