
वाराणसी। केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ के मूलशास्त्र विभाग द्वारा महायान बौद्ध परम्परा के दार्शनिक ग्रन्थ ‘उत्तररतंत्र’ पर पाँच दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का अतिश सभागार में भव्य शुभारम्भ हुआ। देश के विभिन्न प्रान्तों से पधारे 16 प्रख्यात बौद्ध विद्वानों और संस्थान के 10 आचार्यगण सहित 137 प्रतिभागी इस आयोजन में भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि, प्रख्यात बौद्ध गुरु एवं पूर्व कुलपति प्रो. समदोंग रिन्पोछे जी ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का आरंभ किया। उन्होंने ‘उत्तररतंत्र’ में प्रतिपादित तथागतगर्भ (बुद्ध-स्वभाव) के सिद्धान्त पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक प्राणी का चित्त स्वभावतः शुद्ध व प्रभास्वर है, तथा प्रज्ञा-करुणा से मानसिक क्लेशों को दूर किया जा सकता है।
कुलपति प्रो. डॉ. वङछुग दोर्जे नेगी ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि इस ग्रन्थ का उद्देश्य भेदभाव समाप्त कर समता की दृष्टि विकसित करना है। कुलसचिव डॉ. सुनीता चन्द्रा ने ग्रन्थ के दार्शनिक महत्त्व को रेखांकित किया। संगोष्ठी में नालन्दा, लद्दाख, हिमाचल और अरुणाचल सहित कई क्षेत्रों के विद्वान शोधपत्र प्रस्तुत कर रहे हैं।

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