
वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के योगसाधना केन्द्र में रविवार को कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में भव्य सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं, ऐतिहासिक विरासत एवं सांस्कृतिक विविधता की अनुपम झलक प्रस्तुत की गई।
सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 के अंतर्गत ‘सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र’ एवं ‘श्रेष्ठ एवं समृद्ध भारत’ विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक एवं पौराणिक मंगलाचरण, दीप प्रज्ज्वलन तथा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। वैदिक मंत्रों की पावन मंगलध्वनि ने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा से अभिसिंचित कर दिया।
छत्तीसगढ़ राज्य पर आधारित लघु फिल्म दिखाया गया, विद्यार्थियों के द्वारा वहां का लोकगीत तथा भाषण आदि आयोजन भी किया गया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी सांस्कृतिक विविधता, समृद्ध परंपराओं, भाषाओं और राष्ट्रीय एकात्मता में निहित है। भारत के प्रत्येक राज्य की भाषा, परंपरा, लोकाचार, सामाजिक मान्यताओं एवं वहां के निवासियों की सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान करना हम सभी का दायित्व है। किसी राज्य का गठन मात्र भौगोलिक सीमाओं का निर्धारण नहीं, बल्कि उस क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों, सामाजिक मान्यताओं, सांस्कृतिक चेतना एवं परंपराओं को सम्मानपूर्वक पहचान देने का अवसर होता है। छत्तीसगढ़ राज्य का गठन भी वहां की विशिष्ट जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं एवं समृद्ध परंपराओं को विकसित करने तथा राष्ट्रीय विकास में उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने की भावना का प्रतीक है। राज्य स्थापना दिवस उस धरती की सांस्कृतिक अस्मिता एवं विशिष्ट विरासत के सम्मान का अवसर है। उन्होंने कहा कि हमें देश के प्रत्येक राज्य की संस्कृति एवं परंपराओं को आत्मसात करते हुए पारस्परिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के सूत्र को और मजबूत करना चाहिए। विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस समारोह विद्यार्थियों को भारत की बहुआयामी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का सशक्त माध्यम हैं। प्रत्येक राज्य अपनी विशिष्ट पहचान एवं सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित और विकसित करते हुए राष्ट्र की प्रगति में योगदान दे, यही विविधता में एकता का वास्तविक स्वरूप है। सभी की सहभागिता, सम्मान एवं समन्वय से ही माँ भारती का गौरव ध्वज सदैव बुलंद रहेगा। यही ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की वास्तविक आत्मा तथा सशक्त, समृद्ध एवं गौरवशाली राष्ट्र निर्माण का आधार है।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं छात्र कल्याण संकाय प्रमुख प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सामाजिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने विद्यार्थियों को राज्य की समृद्ध विरासत एवं विशिष्ट परंपराओं से परिचित कराया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा, जनजातीय संस्कृति, लोकजीवन एवं ऐतिहासिक विशेषताओं पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। छत्तीसगढ़ के लोकगीतों एवं सांस्कृतिक धुनों के माध्यम से वहां की लोकपरंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान एवं विशेषताओं पर आधारित भाषण, लोकगीत तथा अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो जितेन्द्र कुमार ने कहा कि सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 के अंतर्गत ‘सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र’ एवं ‘श्रेष्ठ एवं समृद्ध भारत’ विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रो. जितेन्द्र कुमार शाही ने कहा कि राष्ट्र की समृद्धि केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि नागरिकों के नैतिक चरित्र, ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा से सुनिश्चित होती है। प्रत्येक नागरिक को भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता रखते हुए पारदर्शिता एवं जवाबदेही को अपने आचरण का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जागरूक नागरिक ही सुरक्षित राष्ट्र की आधारशिला हैं। युवा पीढ़ी में नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं राष्ट्रहित की भावना का विकास ही श्रेष्ठ एवं समृद्ध भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशानुसार 31 अक्टूबर से 15 नवम्बर 2026 तक विभिन्न प्रदेशों के स्थापना दिवस समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में विश्वविद्यालय में छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस का आयोजन सांस्कृतिक एकता, राष्ट्रीय समरसता एवं विद्यार्थियों की रचनात्मक सहभागिता को समर्पित रहा।
कार्यक्रम का संचालन सह-नोडल अधिकारी डॉ. रविशंकर पाण्डेय ने किया।राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
इस अवसर पर कुलसचिव श्री राकेश कुमार, कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार, डॉ. उमाशंकर उपाध्याय , डॉ श्रुति उपाध्याय, सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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