
वाराणसी। धर्म एवं अध्यात्म की प्राचीन नगरी काशी में आयोजित श्री शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिन शाखा कण्ठस्थ दण्डक्रम पारायण वैदिक परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति और भारतीय ज्ञान-विरासत के संरक्षण का अनुपम उदाहरण बन रहा है।
इस अवसर पर पद्मभूषण वेदमूर्ति राजेश्वर शास्त्री द्राविड जी के दौहित्र श्री त्यागराज शर्मा जी, श्री नितिन जी (काशी विभाग प्रचार प्रमुख), काण्व शाखा के विद्वान श्री अनिरुद्ध पेटी जी सहित अनेक गणमान्य अतिथियों एवं विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कांची के विद्वान श्री के. वेंकटरमण घनपाठी जी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
पारायण के परीक्षक के रूप में पारायण श्रोता वेदभास्कर प्रशांत जोशी गुरुजी तथा वेदमूर्ति किरण पाठक गुरुजी उपस्थित रहे। उनके मार्गदर्शन एवं विद्वत्तापूर्ण निरीक्षण में वेदाध्यायी अद्वैत शैलेंद्र काकड़े एवं वेदाध्यायी समर्थ शैलेंद्र काकड़े ने अपनी वैदिक साधना, स्मरणशक्ति एवं गुरुजनों के मार्गदर्शन से दण्डक्रम पारायण की प्रस्तुति दी।
दोनों विद्यार्थियों के पिता एवं गुरु श्री शैलेंद्र काकड़े जी का इस वैदिक साधना में महत्वपूर्ण योगदान है। यह आयोजन इस बात का संदेश देता है कि वेदविद्या केवल पुस्तकीय अध्ययन से नहीं, बल्कि गुरुसेवा, निरंतर अभ्यास, अनुशासन और गुरु-परंपरा के प्रति समर्पण से प्राप्त होती है।
कार्यक्रम के संयोजक श्री गजानन ज्योतकर जी ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी विद्वानों, अतिथियों, सहयोगियों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
काशी की पावन धरती पर आयोजित यह दण्डक्रम पारायण न केवल वैदिक परंपरा के संरक्षण का महत्वपूर्ण प्रयास है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक गुरु-शिष्य परंपरा और सनातन ज्ञान-विरासत को पहुँचाने का प्रेरणादायी माध्यम भी है।

Leave a Reply